Panchkula में रेड लाइट पर पुलिस का प्यारा अंदाज, पिता-बेटी ने पहना हेलमेट, ASI ने दी चॉकलेट, बोली – थैंक्यू पुलिस अंकल

पंचकूला, 7 नवंबर पंचकूला सड़क सुरक्षा केवल नियमों और चालानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदारी, जागरूकता और अच्छे व्यवहार से जुड़ी एक ऐसी…

पंचकूला

पंचकूला, 7 नवंबर

पंचकूला सड़क सुरक्षा केवल नियमों और चालानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदारी, जागरूकता और अच्छे व्यवहार से जुड़ी एक ऐसी आदत है, जिसे समाज के हर व्यक्ति को अपनाना चाहिए। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए पंचकूला पुलिस द्वारा यातायात नियमों का पालन करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए एक अनूठी और सकारात्मक पहल की जा रही है।

रेड लाइट पर पुलिस का प्यारा अंदाज

इसी पहल की एक खूबसूरत झलक आज ओल्ड पंचकूला की रेड लाइट पर देखने को मिली, जहां एक छोटी-सी चॉकलेट ने पुलिस और आम नागरिकों के बीच अपनत्व और विश्वास का प्यारा संदेश दिया।DCP क्राइम एंड ट्रैफिक IPS अमरिंदर सिंह के अनुसार, आज ओल्ड पंचकूला स्थित रेड लाइट पर एक पिता अपनी बेटी को एक्टिवा पर स्कूल से घर लेकर लौट रहे थे। पिता और बेटी दोनों ने हेलमेट पहना हुआ था और रेड लाइट पर रुककर हरी बत्ती होने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान वहां यातायात ड्यूटी संभाल रहे ASI मनोज की नजर हेलमेट पहनकर सफर कर रही बच्ची पर पड़ी।

“थैंक्यू पुलिस अंकल” – बच्ची की मुस्कान ने जीता दिल

बच्ची को यातायात नियमों का पालन करते देख ASI मनोज ने उसे प्यार से एक चॉकलेट और जूस का पैकेट उपहार में दिया। पुलिसकर्मी से अचानक मिले इस प्यारे सरप्राइज से बच्ची के चेहरे पर मुस्कान आ गई। बच्ची ने खुशी से कहा “थैंक्यू पुलिस अंकल” बच्ची की मासूम प्रतिक्रिया सुनकर उसके पिता भी मुस्कुरा उठे।

नियम मानने वालों को सलाम

इसके बाद पिता-बेटी हरी बत्ती होने पर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गए। कुछ ही पलों का यह छोटा-सा घटनाक्रम सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता और पुलिस के मानवीय व्यवहार की एक खूबसूरत मिसाल बन गया।पंचकूला पुलिस कमिश्नर IPS पंकज नैन ने कहा कि पंचकूला पुलिस का उद्देश्य केवल यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान करना नहीं, बल्कि नियमों का पालन करने वाले जिम्मेदार नागरिकों को प्रोत्साहित करना भी है।

बच्चे हैं सड़क सुरक्षा के असली ब्रांड एम्बेसडर

हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना और यातायात नियमों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। ऐसे नागरिकों की सराहना करने से दूसरों को भी नियमों का पालन करने की प्रेरणा मिलती है।उन्होंने कहा कि बच्चे समाज में बदलाव लाने की सबसे बड़ी ताकत हैं। जब बच्चे छोटी उम्र से ही सड़क सुरक्षा के महत्व को समझेंगे और अपने परिवार के सदस्यों को भी नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करेंगे, तो सुरक्षित यातायात की संस्कृति को और मजबूत किया जा सकेगा। ऐसे नन्हे बच्चे ही सड़क सुरक्षा के असली ब्रांड एम्बेसडर हैं, जिनकी मुस्कान और जागरूकता से सुरक्षित सड़कों का सपना साकार हो सकता है।

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