भिवानी में पटवारियों-कानूनगो का धरना, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी, पटवारियों ने छोड़ी कलम, सभी काम हुए ठप

भिवानी, 25 अगस्त भिवानी में पटवारियों और कानूनगो ने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राजस्व…

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भिवानी, 25 अगस्त

भिवानी में पटवारियों और कानूनगो ने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राजस्व विभाग के सॉफ्टवेयर और गिरदावरी प्रक्रिया में बदलाव की मांग उठाई। पटवारियों का कहना है कि उनकी मांगें निजी हितों के लिए नहीं, बल्कि आम जनता को होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए हैं।

भिवानी में राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर पटवारियों और कानूनगो ने दो दिवसीय धरना प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।पटवारी राजेश कुमार ने बताया कि उनकी मुख्य रूप से दो मांगें हैं। पहली मांग इंतकाल दर्ज करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे रेवेन्यू हरियाणा सॉफ्टवेयर से जुड़ी है। उनका आरोप है कि सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामियों के कारण सही जानकारी दर्ज करने के बावजूद प्रिंट में हिस्से, मलिकियत और मालिक का नाम गलत या अधूरा दिखाई देता है। इससे कर्मचारियों के साथ-साथ आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

वहीं दूसरी प्रमुख मांग DCS गिरदावरी की रेंज को लेकर है। पटवारियों के अनुसार वर्तमान में 20 मीटर की रेंज होने के कारण खेतों में फसल की गिरदावरी करने में परेशानी आती है। धान के खेतों में पानी और बाजरे की ऊंची फसल के कारण 20 मीटर के दायरे में काम करना मुश्किल होता है। कर्मचारियों ने इस रेंज को बढ़ाकर कम से कम 150 मीटर करने की मांग की है।

पटवारियों का कहना है कि उनकी मांगें जायज हैं और वे अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि जनता के हित में धरने पर बैठे हैं। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले भी हड़ताल की गई थी, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राज्य कार्यकारिणी का आह्वान हुआ तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।

साथ ही उन्होंने कहा कि विरोध दिन-प्रतिदिन बढ़ाया जाएगा और उन्हें सर्व कर्मचारी संघ तथा किसान यूनियनों का भी समर्थन मिल रहा है।पटवारियों ने बताया कि हड़ताल के दौरान सभी प्रकार के काम लंबित हैं और कर्मचारियों ने पूरी तरह से कलम छोड़ रखी है। उन्होंने कहा कि इसका असर सरकारी कामकाज पर पड़ रहा है।

अब देखना होगा कि पटवारियों और कानूनगो की मांगों को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है और कर्मचारियों का यह आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है।

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