मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पंजाब की ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम को दिया प्रोत्साहन; दूसरे बैच के लिए आवेदन अगस्त की शुरुआत में खुलेंगे

चंडीगढ़, 31 जुलाई 2026 नशों की लत से निपटने के लिए समग्र दृष्टिकोण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए पंजाब सरकार ने…

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चंडीगढ़, 31 जुलाई 2026

नशों की लत से निपटने के लिए समग्र दृष्टिकोण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए पंजाब सरकार ने फरवरी 2026 में नशों के विरुद्ध देश की पहली फेलोशिप ‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एलएमएचपी)’ शुरू की थी। इस कार्यक्रम के पहले बैच के 13 फेलो इस समय पंजाब भर में काम कर रहे हैं और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

एलएमएचपी फेलो मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान के तहत प्रदेश भर में स्वास्थ्य सेवाओं को सहयोग दे रहे हैं और नशों के विरुद्ध लड़ाई में स्वास्थ्य-केंद्रित एवं सामुदायिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ कर रहे हैं। यह प्रदेश की मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली को और मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है कि पुनर्वास पंजाब के नशा विरोधी अभियान का मुख्य आधार बना रहे।

अब पंजाब सरकार इस कार्यक्रम के दूसरे बैच के 10 फेलो और 7 सीनियर एसोसिएट के लिए आवेदन मांगने की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इसका उद्देश्य प्रदेश के सभी 23 जिलों में प्रशिक्षित युवा पेशेवरों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन और प्रदेश की डेटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (डी.आई.टी.एस.यू.) के निकट सहयोग से चलाए जा रहे एलएमएचपी के तहत ऐसे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम तैयार की जा रही है, जो प्रदेश भर में प्रमाण-आधारित नशा रोकथाम और पुनर्वास से संबंधित गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकें। एलएमएचपी फेलो मनोविज्ञान, लोक स्वास्थ्य और सामाजिक कार्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर हैं, जिन्होंने दो साल की अवधि के लिए प्रदेश के नशा विरोधी अभियान में योगदान देने का संकल्प लिया है। एक कठोर चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए ये फेलो मनो-सामाजिक हस्तक्षेप, नशे की लत से पुनः लत लगने से रोकथाम, कार्यक्रम प्रबंधन, समुदाय-आधारित पुनर्वास और नेतृत्व कौशल में गहन प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम के चयन-सह-ज्ञान भागीदार, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टी.आई.एस.एस.), मुंबई के सहयोग से दिया जाता है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम प्रदेश में परिवारों की खुशहाली और उम्मीद को बहाल करने के लिए नेतृत्व को सहानुभूति के साथ जोड़ने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, “‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ सिर्फ नशों के खिलाफ एक अभियान नहीं है; यह पंजाब की जवानी को वापस मोड़ने और संभालने का एक आंदोलन है। जहां नशा तस्करों और तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं हम नशे के हर पीड़ित को सम्मानजनक जीवन की ओर वापस लाने और युवाओं को लत के जाल में फंसने से रोकने के लिए भी उतने ही प्रतिबद्ध हैं। लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम हमारे इस विश्वास को दर्शाता है कि पंजाब को नशा मुक्त बनाना तभी संभव है जब सख्त कार्रवाई, उपचार और रोकथाम- तीनों एक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली और सामुदायिक सहयोग के साथ मिलकर काम करें और उन्हें मजबूत स्वास्थ्य ढांचे और सामुदायिक सहयोग का समर्थन हासिल हो।”

उन्होंने आगे कहा कि नशे की लत एक लंबे समय तक रहने वाली स्वास्थ्य समस्या है, जिसके लिए निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है। विभिन्न जिला अस्पतालों और नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में अपनी तैनाती के दौरान ये फेलो नशे की समस्या को सिर्फ एक व्यक्तिगत बीमारी नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनौती के रूप में समझने का प्रत्यक्ष अनुभव हासिल करते हैं। वे परिवारों से बातचीत करते हैं, नशे के कारण उत्पन्न पारिवारिक संकटों को कम करने में मदद करते हैं, मरीजों को उपचार प्रक्रिया से जोड़ते हैं, दोबारा नशे की ओर जाने से रोकने में सहयोग देते हैं और पुनर्वास को प्रोत्साहित करते हैं। इसके साथ ही वे सामाजिक कलंक की भावना को कम करने, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और नशा मुक्ति कार्यक्रम पूरा करने के बाद भी मरीजों की निरंतर देखभाल सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देते हैं।

जिला स्तर पर नेतृत्व प्रदान करने के अलावा, एलएमएचपी के पहले बैच के फेलो स्वास्थ्य कर्मचारियों को सहयोग देने, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने और नशों के विरुद्ध अभियान में प्रभावी कार्य-प्रणालियों को संस्थागत रूप देने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम’ का पहला बैच समाज के नशों के उपयोग और लत को समझने और उसके प्रति प्रतिक्रिया देने के तरीके में बड़ा बदलाव ला रहा है। ऐसा करके, पंजाब अपनी ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम के केंद्र में मानसिक स्वास्थ्य को शामिल कर रहा है, यह स्वीकार करते हुए कि नशों के विरुद्ध लड़ाई सिर्फ आपूर्ति रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि मनों को स्वस्थ करने, परिवारों का पुनर्वास करने और सहानुभूति तथा देखभाल के साथ जीवन को पुनः सजीव करने के बारे में भी है।

 

 

 

 

 

 

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