कलायत, 15 जुलाई
कलायत क्षेत्र के सजूमा गांव में पिछले दो हफ्तों से हेपेटाइटिस ‘ए’ (पीलिया) के प्रकोप के कारण भय और मातम का माहौल बना हुआ है। दूषित पेयजल आपूर्ति की वजह से गांव में बीमारी इस कदर भयावह रूप ले चुकी है कि 11 वर्षीय मासूम बच्ची रितिका की जान जा चुकी है, जबकि 7 अन्य बच्चे फिलहाल सरकारी व निजी अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गांव के 1487 घरों का सर्वेक्षण कर 103 बच्चों के रक्त के सैंपल लिए गए हैं, जिनमें से अब तक 32 बच्चों में हेपेटाइटिस ‘ए’ की पुष्टि हो चुकी है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कैथल की उपायुक्त (डीसी) अपराजिता ने बुधवार को खुद सजूमा गांव का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया।
डीसी अपराजिता सबसे पहले गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं, जहां उन्होंने बीमार बच्चों के आंकड़ों और स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की। इसके बाद वे मृतक बच्ची रितिका के घर पहुंचीं और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए हरसंभव सरकारी सहायता का भरोसा दिया। जब डीसी गांव के वाटर सप्लाई स्टेशन पर निरीक्षण के लिए पहुंचीं, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि गांव को नहरी पानी देने की योजना तो कागजों में आ चुकी है, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण उन्हें आज तक इसका लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की अनदेखी से उन्हें स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा है और नहर से वॉटर टैंकों में आने वाली पानी की सप्लाई भी बेहद कम है, जिसके चलते लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त अपराजिता ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी पीने के पानी से जुड़ी सभी मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस गंभीर लापरवाही और बीमारी के फैलने के लिए जो भी अधिकारी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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