FARIDKOT जिले में वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम नीति के विरोध में किया रोष प्रदर्शन, काली पट्टियां बांधी

फरीदकोट 10 जुलाई पंजाब बार एसोसिएशनों की संयुक्त एक्शन कमेटी (जेएसी) के आह्वान पर पंजाब भर मे 70 हजार वकील की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर…

फरीदकोट

फरीदकोट 10 जुलाई

पंजाब बार एसोसिएशनों की संयुक्त एक्शन कमेटी (जेएसी) के आह्वान पर पंजाब भर मे 70 हजार वकील की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। पंजाब भर मे यह हड़ताल लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम नीति के विरोध में की गई है। सर्वसम्मति से इस हड़ताल को अनिश्चितकालीन जारी रखने का फैसला लिया गया है। वर्तमान LADC नीति का वकीलों, विशेषकर बार एसोसिएशन के युवा सदस्यों के कार्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। पहले कानूनी सहायता से जुड़े मामलों की पैरवी पैनल अधिवक्ता किया करते थे, लेकिन अब ये मामले मौजूदा नीति के तहत भेजे जा रहे हैं, जिससे प्रदेशभर के वकीलों के लिए समान पेशेवर अवसर प्रभावित हो रहे हैं। वकीलों ने कहा कि यह विरोध केवल पंजाब तक सीमित नहीं है और देश के कई राज्यों में भी अधिवक्ता इस प्रणाली को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस नीति पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, तब तक उनकी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी और कोई भी वकील अदालत में पेश नहीं होगा।
पंजाब की बार एसोसिएशनों ने लगातार यह मांग उठाई है कि मौजूदा नीति में गंभीर कमियां हैं और इस पर तुरंत पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन मुफ्त कानूनी सहायता के खिलाफ नहीं है। हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि प्रत्येक पात्र नागरिक को उचित कानूनी प्रतिनिधित्व मिले। हमारी मांग केवल इतनी है कि कानूनी सहायता प्रदान करने की व्यवस्था पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह हो तथा इसे पहले की तरह जिला बार एसोसिएशनों के माध्यम से लागू किया जाए। हड़ताल की प्रमुख मांगें मौजूदा LADC प्रणाली को वापस लेने और जिला बार एसोसिएशनों के माध्यम से पहले वाला पैनल सिस्टम बहाल करने, वकीलों के लिए व्यापक ग्रुप बीमा योजना तुरंत लागू किए जाने, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, बार काउंसिल आफ पंजाब एंड हरियाणा के चुनाव कार्यक्रम की समीक्षा संबंधी निर्णय वापस लिए जाने, जिसे कई बार एसोसिएशन वर्ष 2015 के चुनाव नियमों के विरुद्ध मानती हैं तथा कानूनी बिरादरी की स्वतंत्रता, सम्मान और पेशेवर हितों की रक्षा सुनिश्चित किए जाने आदि हैं।

इस संबंध में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरजगपाल सिंह बराड़ और सैमुअल मसीह, एडवोकेट ने कहा कि LADC प्रणाली वकालत के पेशे और आम जनता के हितों के विपरीत है। उन्होंने इसे वकीलों के लिए मारू नीति करार देते हुए आरोप लगाया कि इससे स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने वाले वकीलों, विशेषकर युवा अधिवक्ताओं, की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। प्रदर्शन कर रहे वकीलों का कहना है कि वर्तमान में लीगल एड मामलों में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं को काम मिलता है, जबकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद ये मामले कुछ चुनिंदा नियुक्त डिफेंस काउंसिल तक सीमित हो जाएंगे। उन्होंने आशंका जताई कि इससे आम वकीलों की जरूरत कम होगी और रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे।
इसी के तहत पंजाब भर मे 70 हजार वकील की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। फरीदकोट जिले के सभी 925 वकीलों ने अपना कामकाज पूरी तरह बंद रखा और बार एसोसिएशन परिसर में रोष धरना दिया। वकीलों ने कहा कि यह विरोध केवल पंजाब तक सीमित नहीं है और देश के कई राज्यों में भी अधिवक्ता इस प्रणाली को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस नीति पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, तब तक उनकी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी और कोई भी वकील अदालत में पेश नहीं होगा।

वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अभियोजन पक्ष के लिए सरकारी वकील नियुक्त करती है और अब बचाव पक्ष के लिए भी सरकार समर्थित व्यवस्था लागू की जा रही है। उनका कहना है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। कुछ वकीलों ने यह भी दावा किया कि इस प्रणाली में नियुक्त डिफेंस काउंसिल अदालत एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत काम करते हैं, जिसके कारण वे निजी वकीलों की तरह पूरी स्वतंत्रता से जिरह नहीं कर पाते। हालांकि, LADC प्रणाली का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर आरोपियों को प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण कानूनी सहायता उपलब्ध कराना बताया गया है।

 

 

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