शिक्षा मंत्री ने सफल विद्यार्थियों को दी दिल से बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं

चंडीगढ़, 11 मई: मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा लागू किए गए शिक्षा सुधारों के चलते पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड…

Rural students outshine urban peers in Class 10th results; Jaito’s Harleen tops Punjab with 99.38%: Harjot Bains

चंडीगढ़, 11 मई:

मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा लागू किए गए शिक्षा सुधारों के चलते पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा आज घोषित 10वीं कक्षा के परिणामों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने शहरी स्कूलों के छात्रों को पीछे छोड़ दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पास प्रतिशत 95.35% दर्ज किया गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 92.98% रहा।

आज यहां विवरण साझा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स हरजोत सिंह बैंस ने इस परिणाम की सराहना करते हुए इसे जमीनी स्तर पर ‘शिक्षा क्रांति’ के प्रभावी रूप से लागू होने का प्रमाण बताया।

Punjab Class 10th Results Topper
Punjab Class 10th Results Topper

सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जैतो (फरीदकोट) की छात्रा हरलीन शर्मा ने 650 में से 646 अंक (99.38%) प्राप्त कर पूरे पंजाब में पहला स्थान हासिल किया। कड़े मुकाबले में सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, चनौली बसी (रूपनगर) के मनीमहेष शर्मा ने 650 में से 645 अंक (99.23%) हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। श्री गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल, चीफ खालसा दीवान, मॉडल टाउन, होशियारपुर की रिया रानी ने 650 में से 645 अंक (99.23%) प्राप्त कर तीसरा स्थान हासिल किया।

स हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में 2,69,505 विद्यार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 2,54,744 विद्यार्थी सफल घोषित हुए हैं। इस प्रकार कुल पास प्रतिशत 94.52% रहा। ग्रामीण विद्यार्थियों ने शहरी विद्यार्थियों को पीछे छोड़ते हुए बेहतर प्रदर्शन किया। ग्रामीण क्षेत्रों से 1,74,958 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से 1,66,830 विद्यार्थी पास हुए और उनकी पास दर 95.35% रही। वहीं शहरी क्षेत्रों से 94,547 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से 87,914 विद्यार्थी पास हुए, जिससे उनकी पास दर 92.98% दर्ज की गई।

सभी सफल विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए स बैंस ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की पास दर में 2.3 प्रतिशत अंकों का अंतर पिछले वर्षों के रुझानों की तुलना में एक ऐतिहासिक बदलाव है, क्योंकि पहले अक्सर शहरी स्कूल ही आगे रहते थे। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय शिक्षा के बुनियादी ढांचे में किए गए निवेश और अध्यापकों को दी जा रही नियमित प्रशिक्षण व्यवस्था को दिया।

उन्होंने कहा कि यह केवल विद्यार्थियों का रिपोर्ट कार्ड नहीं है, बल्कि उस सरकार का भी रिपोर्ट कार्ड है जो विशेषाधिकार के बजाय समान अवसर प्रदान करने में विश्वास रखती है।

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