Tamil Nadu Election Ruselt: जानिए तमिलनाडु की राजनीति टीवीके नेता विजय ने कैसे रचा इतिहास, जानिए सीएम एमके स्टालिन को किसने हराया?

Tamil Nadu Election Ruselt: तमिलनाडु की राजनीति टीवीके के नेता विजय ने चुनाव में नया इतिहास रचा है. उनकी पार्टी ने डीएमके और एआईएडीएमके जैसी…

Tamil Nadu Election Ruselt: जानिए तमिलनाडु की राजनीति टीवीके नेता विजय ने कैसे रचा इतिहास, जानिए सीएम एमके स्टालिन को किसने हराया?

Tamil Nadu Election Ruselt:

तमिलनाडु की राजनीति टीवीके के नेता विजय ने चुनाव में नया इतिहास रचा है. उनकी पार्टी ने डीएमके और एआईएडीएमके जैसी द्रविड़ पार्टियों को पिछे छोड़ दिया है. यह सबसे खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि 1967 से ही राज्य की राजनीति में इन पार्टियों ने अपना दबदबा बनाया था. इसके अलावा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन खुद भी चुनाव हार गए है. वे कोलाथुर विधानसभा सीट से चुनाव हारे हैं. उन्हें टीवीके के वीएस बाबू ने 8795 वोट से हराया. वीएस बाबू को 82997 वोट मिले जबकि स्टालिन को 74202 वोट मिले.

कैसे विजय ने रचा इतिहास?

एमजीआर के बाद तमिलनाडु में अपने पहले ही चुनाव में विजय ने सत्ता में मौजूद सभी प्रमुख पार्टियों को पछाड़कर जनता के बीच अपने असर को साबित किया. विजय ने 33 साल पहले एक संकोची हीरी के रूप में तमिल सिनेमा में एंट्री की. राजनीति में आने के बाद पहले ही चुनाव में नया कीर्तिमान बनाते दिखे. उनका जीवन और फिल्मी करियर लगभग एक जैसा ही रहा है. विजय ने कम उम्र में अभिनय शुरू किया और नालैया थीरपू जैसी शुरुआती असफलताओं के बावजूद धीरे-धीरे आगे बढ़े. उन्हें असली पहचान पूवे उनक्कागा से मिली, जिसने उनकी छवि बदल दी. 2010 के बाद उनकी फिल्मों में नेतृत्व के गुण अधिक स्पष्ट रूप से दिखने लगे. रिसर्चर मोहम्मद इलियास के अनुसार, मर्सल और सरकार जैसी फिल्मों ने उन्हें एक नेता के रूप में स्थापित करने वाली छवि बनाई, जिसकी तुलना अक्सर एम जी रामचंद्रन से की जाती है. इसी के साथ उनकी राजनीतिक रुचि भी धीरे-धीरे बढ़ी. जैसा कि उन्होंने कहा था, मंच से आगे बढ़कर मदद करने के लिए, सत्ता हाथ में होना जरूरी है.

पहली बार सिटिंग मुख्यमंत्री को गंवानी पड़ी सीट

सीएम स्टालिन कोलाथुर सीट से हारे वे 2011 से इसका प्रतिनिधित्व कर रहे थे. स्टालिन तमिलनाडु के चौथे ऐसे मौजूदा मुख्यमंत्री हैं, जो अपनी ही सीट हारे. 1996 में जे. जयललिता की हार के बाद यह पहली बार, सिटिंग मुख्यमंत्री को अपनी सीट गंवानी पड़ी. 1952 के पहले आम चुनाव में कांग्रेस के पीएस कुमारस्वामी राजा श्रीविल्लिपुथुर सीट से हार गए थे. 1967 में कांग्रेस राज्य की सत्ता से बाहर हो गई और डीएमके सत्ता में आई. उस समय के मुख्यमंत्री एम भक्तवत्सलम भी श्रीविल्लिपुथुर सीट से हार गए थे. 1996 के विधानसभा चुनाव में डीएमके ने तमिल मानिला कांग्रेस के साथ गठबंधन कर भारी जीत हासिल की. उस समय की सत्तारूढ़ एआईएडीएमके की मुख्यमंत्री जे जयललिता बरगुर सीट से हार गई थीं. करीब तीन दशक बाद, स्टालिन तमिलनाडु के चौथे ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं, जो सत्ता में रहते हुए अपनी सीट हार गए. वो डीएमके के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनके साथ ऐसा हुआ.

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