Sangrur : हम अपना इलाज करवाने के लिए बड़े सरकारी अस्पतालों में जाते हैं. जहां हम अपना इलाज करवाते हैं और तंदुरुस्त होकर लौटते हैं, लेकिन जब सरकारी अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से खुद ही बीमार हो तो वो लोगों को कैसे ठीक करेगा? ये एक बड़ा सवाल है. ऐसा ही मामला संगरूर के सरकारी अस्पताल में आया है जहां लिविंग इंडिया न्यूज की टीम ने जानने की कोशिश की, कि सरकारी अस्पताल की हालत कैसी है? मौके पर गयी हमारी टीम ने देखा कि सरकारी अस्पताल में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, चाहे प्रसूती वार्ड की बात करें या फिर संगरूर की इमरजेंसी की, हर जगह पीने के पानी की सहूलियत सिर्फ एक मजाक है.
गंदा पानी पीने की मजबूरी
प्यास की वजह से मरीज गंदा पानी पी रहे हैं. वो भी गंदी जगह पर खडे़ होकर. अस्पताल की हालत कुछ ऐसी है कि वहां सांस लेना भी मुश्किल है, लेकिन मरीजों की मजबूरी है. अस्पताल में लगे वाटर कूलर भी खस्ता हाल हैं. पीने के पानी के नाम पर मरीजों के साथ मजाक किया गया है.
क्या कहते हैं परिजन ?
इस बारे में अस्पताल में आये मरीजों के परिजनों से बात की गई तो उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कहा – हम तो यहां अपने रिश्तेदारों की जान बचाने उन्हें लेकर यहां आए थे, लेकिन क्या पता है कि अगर दवाइयों ने अपना काम किया भी तो पानी और यहां के हालात उनके परिजनों को ठीक होने देंगे भी या नहीं?
बात यहीं तक रहती तो भी ठीक थी. लेकिन अस्पताल के टॉयलेट (TOILET ) का नजारा तो और भी चौंकाने वाला है. टॉयलेट के पास लगा नल खराब है, लगातार पानी बह रहा है, लेकिन किसी का ध्यान नहीं है. जबकि सरकारें जल ही जीवन है, जल बचाओ, कल बचाओ जैसे नारे दे रही है, जबकि अगला विश्व युद्ध पानी की वजह से होने की आशंका जताई जा रही है, ऐसे में एक ओर तो पानी की किल्लत और दूसरी ओर पानी की बर्बादी अस्पताल प्रशासन को कठघरे में खड़ा करता है।
स्वच्छ भारत अभियान को पलीता!

केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान कोभी यहां पलीता लगता दिखता है. चारों ओर पसरी गंदगी अस्पताल की बदहाली की कहानी बयां कर रही है, लेकिन सबने चुप्पी साध ली है. कहते हैं, एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है, लेकिन क्या ये तस्वीरें प्रशासन को कुंभकर्णी नींद से जगा पाएगी?
