रोहतक (हरियाणा) : लोकसभा में देशभर में कर्ज के बोझ से दबे किसानों की बदतर हालत पर नियम 193 के तहत चर्चा के दौरान सांसद दीपेन्द्र ने सरकार को उसी के आंकड़ों से घेरा तथा मांग रखी कि पंजाब,कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र की तर्ज पर हरियाणा के किसानों का भी कर्ज माफ किया जाये ताकि उन्हें कर्ज के बोझ से मुक्ति मिल सके। सांसद ने कहा कि खुद सरकार की गलत नीतियों की वजह से आज देश का किसान सड़कों पर आन्दोलन करने को मजबूर है। कांग्रेस की सरकार के समय धान,गेहूं, कपास जैसी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में हर वर्ष 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की जाती थी, मगर अब पिछले 3 सालों में भाजपा सरकार के आने के बाद से बढ़ोत्तरी के नाम पर मात्र 4 से 5 प्रतिशत वृद्धि करके कोरम पूरा किया जा रहा है। मौजूदार महंगाई दर इस वृद्धि से ज्यादा है। यही कारण है कि पिछले 3 सालों में किसानों की आमदनी घटी, उन पर कर्जे का बोझ बढ़ा और अब जब सरकार की तरफ से कुछ भी मिलने की उम्मीद टूट चुकी है तो किसानों को मजबूरन सड़कों पर आना पड़ा। कर्ज के बोझ से बुरी तरह दबा हुआ किसान जब मदद की गुहार लगाता है तो उसे भाजपा सरकार की तरफ से लाठियां और गोलियां खानी पड़ती हैं। दीपेन्द्र ने सरकार को चेताते हुए कहा कि “ किसान चुप है मगर गूंगा नहीं है, किसान सो रहा है मगर मरा नहीं है, किसान के पसीने में खुशबू है, अगर उस पसीने को आप नजरंदाज करोगें तो यह जवाला बनकर फूटेगा जिसका परिणाम आपको भुगतना पडेगा”। कांग्रेस सांसद दीपेन्द्र ने संसद में चर्चा के दौरान सरकार से किसानों पर छाये संकट के मुद्दे को संवेदनशीलता के साथ देखने को कहा और किसानों की बेहतरी के लिये 9 सुझाव भी दिये और इनको तुरंत अमल में लाने की मांग की।
1. घटती आमदनी और कर्जे के बोझ से दबे किसानों के कर्ज माफ़ कर उनको भी राहत दे सरकार।
2. दीपेन्द्र ने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करके लागत के ऊपर 50फीसदी मुनाफा देने का वादा किया था। लेकिन, सरकार बनने के बाद धान पर जो 39 प्रतिशत तक का मुनाफा यूपीए सरकार के समय मिलता था उसको घटा कर कुल6 प्रतिशत कर दिया। यह किसानों के साथ वादा खिलाफी नहीं है तो और क्या है? सरकार को तुरन्त स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू कर लागत पर 50 फीसदी मुनाफा देने का वादा पूरा करना चाहिए।
3. सांसद ने गन्ना किसानों की व्यथा सरकार के आगे रखते हुए कहा कि देश में जब चीनी का बाजार भाव 35रुपये प्रति किलो था तब, हरियाणा में चौ. भूपेन्द्र सिंह हुड्डा जी की सरकार गन्ना किसान को देश में सबसे ज्यादा 310 रुपये प्रति क्विंटल का भाव देती थी। अब जब चीनी का बाजार भाव 40 रुपये प्रति किलो है तो गन्ने का भाव 320 रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की, कि गन्ने का मूल्य चीनी के बाजार भाव के अनुपात में तय किया जाये और गन्ना किसान को 410 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दिया जाये।
4. खेती-किसानी पर चर्चा के दौरान लोकसभा में दीपेन्द्र ने सरकारी आकड़ों से ही सरकार के झूठ का पर्दाफाश कर दिया। दीपेन्द्र ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर किसानों के साथ हो रही खुली लूट का मुद्दा भी जोरदार ढंग से रखा और मजबूत आंकड़े रखकर पूरी सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार को बताया कि किस तरह से किसानों से लूट कर निजी कंपनियों की तिजोरियां भरी जा रही हैं। केवल हरियाणा में निजी कंपनियों ने खरीफ वर्ष 2016 में किसानों से 178 करोड़ प्रीमियम ऐंठ कर 98 प्रतिशत मुनाफा कमाने का काम किया है। उन्होंने सरकार से मांग रखी कि किसानों से हो रही इस लूट को तुरंत बंद किया जाए।
5. इसी प्रकार फल, सब्जी पोपलर आदि की खेती करने वाले किसानों का हाल भी बुरा है। आये दिन किसानों को मजबूरन कहीं टमाटर तो कहीं आलू की फसल को सड़कों पर फेंकना पड़ता है। दीपेन्द्र ने मांग करी कि सरकार फलों और सब्जियों का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का काम करे।पोपलर की खेती करने वालों की समस्या सरकार के समक्ष रखते हुए सांसद ने बताया कि तीन साल पहले तक जिस पोपलर का दाम बाजार में 1200 रुपये था अब वह गिर कर मात्र 300 से 400 रुपये रह गया है। दाम गिरने से किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। दीपेन्द्र ने सरकार से मांग की कि पोपलर का समर्थन मूल्य 1200 रुपये तय किया जाए।
6. सांसद ने कृषि उपकरण, खाद और कीटनाशक को जीएसटी के दायरे में लाने के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस फैसले से खेती की लागत बढ़ेगी और किसान की कमाई घटेगी। उन्होंने सरकार के सामने मांग रखी कि इन सभी को तुरन्त जीएसटी के दायरे से बाहर किया जाए।
7. ठेके पर खेती करने वालों पर सरकार ने 18 प्रतिशत जीएसटी थोपने का काम किया है। इस फैसले से भूमिहीन गरीब काश्तकारों की कमर टूट जायेगी। सांसद ने ठेके पर खेती करने वालों को जीएसटी से छूट देने की हिमायत की।
8. दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले 3 सालों में आयी भारी गिरावट के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सरकार ने कोई कमी नहीं की बल्कि इस पर टैक्स बढ़ाकर 2 लाख 35 हजार करोड़ कमाने का काम किया है। उन्होंने सरकार के समक्ष मांग रखी कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाकर इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं और किसानों को दिया जाए।
9. सरकार की खाद्यान आयात निर्यात नीति पर सवाल खड़ा करते हुए सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि पिछले 3सालों में गेहूं, मक्का और नॉन बासमती चावल का आयात 134 करोड़ रुपये से बढ़ कर 2016-17 में 9000 करोड़ रुपये पहुंच गया है। आयात में 6000 प्रतिशत का यह उछाल हैरान करने वाला है। जबकि,दूसरी ओर खाद्यान्न निर्यात साल दर साल गिरता जा रहा है।
