पंचकूला हिंसा में किरकिरी झेल चुकी हरियाणा सरकार की राह में एक और मुश्किल खड़ी है वो है जाट आरक्षण का मुद्दा। क्योंकि जाट आरक्षण मामले में भी फैसले की तारीख इसी सप्ताह है। और मुश्किल इसलिए बढ़ सकती है क्योंकि हाइकोर्ट ने पहले भी जाटों को आरक्षण देने पर रोक लगा दिया था। उसके बाद सरकार ने जो पक्ष कोर्ट में पेश किए इससे संभावना है कि आरक्षण पर सरकार के पक्ष में फैसला नहीं आ पाएगा । यानि एक बार फिर इस मामले को लेकर सरकार घिरने वाली है। दरअसल इस केस को देख रहे जस्टिस एस एस सारों 3 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं। तीन सितंबर को रविवार है और उससे पहले 2 सितंबर यानी शनिवार मतलब दो दिन कोर्ट की छुट्टी। यानि शुक्रवार को फेयरवेल से पहले जस्टिस सारों इस मामले पर फैसला सुना सकते हैं।जो सरकार की मुश्किल बढ़ा सकती है।
बतादें की जब जाट समेत 6 जातियों के आरक्षण पर रोक लगाया था तो प्रदेश में हिंसा भड़की थी। जाटों के आंदोलन के बाद सरकार ने एक्ट बनाकर आरक्षण का लाभ दिया था जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, इस मामले की भी फाइनल बहस हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है।
पंचकूला हिंसा के बाद हरियाणा सरकार की एक ओर मुश्किल बढ़ने वाली है। दरअसल हाईकोर्ट में जाट आरक्षण मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस एस एस सारो इसी हफ्ते रिटायर हो रहे हैं। और जाट आरक्षण मामले की भी फाइनल बहस हो चुकी है फैसला सुरक्षित है। और उम्मीद है कि जस्टिस सारों फेयरवेल से पहले जाट आरक्षण पर फैसला दे सकते है। अब सरकार की मुश्किल इसलिए बढ़ने वाली है क्योंकि हाईकोर्ट पहले से इस मामले पर रोक लगा रखा है और कोर्ट में जो सरकार ने दलील दी है उसे याचिकाकर्ता पक्ष ने खारिज कर दिया है। क्योंकि जाट आंदोलन पहले भी हरियाणा को खून के आंसू रूला चुका है उसके बावजूद भी फैसले को लेकर सरकार ने कोई तैयारी अभी तक नहीं की है।
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