संविधान के नियमों का रखवाला कौन, सदन की मर्यादाओं को बचाने वाला कोन,लोकतंत्र की दुहाई देने वाले ही जब लोकतंत्र की धज्जियाँ उड़ाने लगे तो ये सवाल उठना लाजमी हो जाता है-! दरअसल पंजाब विधानसभा के सातवें दिन के सत्र के दौरान सिख विधायक की पग गिर गयी और महिलाओं से भी बदसलूकी का आरोप लगा—-और सभी आरोपों के केंद्र बिंदू स्पीकर केपी राणा रहे , विपक्ष के पास आरोपों की लड़ी है।
विधानसभा सत्र के आठवें दिन भी सदन के अंदर से लेकर बाहर तक हंगामा होता रहा—अकाली दल के विधायकों ने काले चोगे पहनकर सदन के बाहर स्पीकर के खिलाफ नारेबाजी की और तबतक सदन से बाहर रहने की बात कही जबतक की राणा केपी को स्पीकर के पद से नहीं हटाया जाता है-
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सुखबीर सिंह बादल ने स्पीकर का विरोध करते हुए स्पीकर को तानाशाह शासक की संज्ञा दी।
इधर सदन के बाहर सुखबीर बादल सरकार पर बरस रहे थे तो दूसरी तरफ अमृतसर में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत बादल सदन में सरकार के रवैये पर राहुल गांधी से सीएम का इस्तीफा लेने की मांग कर रही हैं।
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जाहिर है सदन की गरिमा को बचाये रखना सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए उतना ही जरूरी है..क्योंकि गरिमा संविधान की होती है और मर्यादा पद की होती है..लेकिन उस पद पर बैठकर अगर कोई भी जनप्रतिनिधि इन मर्यादाओं को भूल जाए तो फिर ऐसी तस्वीरें सामने आनी लाजमी है.
