रामभतेरी अब घर का चौका-चूल्हा संभाल रही हैं। कभी कबड्डी में देश-प्रदेश का नाम रोशन करने वाली रामभतेरी अब पशुओं के लिए चारा काटती हैं, डालती हैं और घर के काम में मां का हाथ बंटाती हैं। हमने जब कबड्डी खिलाड़ी रामभतेरी से इस नाराजगी की वजह जानना चाहा तो खिलाड़ी और उसके परिजनों ने कहा कि इतनी कामयाबी के बावजूद उसे नौकरी तो मिली नहीं। सरकार ने उसकी उपेक्षा ही की। पिता ने कहा कि अब उसकी शादी तो करवानी ही है, इसलिए घर के कामों में भी उसे पारंगत करना पड़ेगा।
कबड्डी खिलाड़ी रामभतेरी के कोच राजबीर गिल का अरोप है कि सरकार का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा सिर्फ कागजों में है। खेल मंत्री अनिल विज सिर्फ अंबाला जिले के बारे में सोचते हैं। उन्होंने बताया कि एक बार वे रामभतेरी व खिलाड़ियों को लेकर खेल मंत्री अनिल विज से मिलने गए, लेकिन वहां पर उन्हें सिर्फ धक्के मिले। इस संबंध में वे टोहाना विधायक व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला से भी गुहार लगाई थी कि खिलाड़ी रामभतेरी को नौकरी दी जाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी।
खेल को छोड़कर घरेलू कामों में जुटने के बारे में कबड्डी खिलाड़ी रामभतेरी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उसने सोचा था कि खेल के माध्यम से उनका और उनके परिवार का जीवन सुधरेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। दिनरात एक करके देश के लिए मेडल लेने के बावजूद भी परिवार के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हो सके। ऊपर से ट्रेनिंग और खेल का खर्च
इस कबड्डी खिलाड़ी रामभतेरी की उपलब्धियां अब तक काफी रही है साल 2012 में पंजाब में आयोजित कबड्डी विश्व कप विजेता टीम की सदस्य इस खिलाड़ी की आस गई है लेकिन सवाल अब यह है अगर खिलाड़िओं ने साथ ऐसे ही होता रहा तो भला हम ओलिंपिक के लिए कैसे खिलाड़ी तैयार करेंगे !
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