भक्तों के दुख हरेंगे विघ्नहर्ता भगवान गणेश

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : गणेश चतुर्थी के अवसर पर श्रद्धालुओं के घर में मेहमान बनकर विराजमान गणपति महाराज इस बार 12 दिनों तक विराजमान हैं।…

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : गणेश चतुर्थी के अवसर पर श्रद्धालुओं के घर में मेहमान बनकर विराजमान गणपति महाराज इस बार 12 दिनों तक विराजमान हैं। 5 सितंबर को पूजा का समापन हो जाएगा। गणेश महोत्सव के अवसर पर कैथल के श्री ग्यारह रूद्री मंदिर में भी गणेशोत्सव काफी हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। पूजा को लेकर विशेष तैयारियां रखी गई हैं। मंदिर के पुजारी पंडित दिनेश भारद्वाज ने विघ्नहर्ता के इस दिव्य उत्सव के माध्यम के शुभ-लाभ प्राप्त करने के बारे में भी बताया। साथ ही इसकी जानकारी भी दी कि गणपति के आगमन की दिव्य तिथि की महिमा क्या है।

  • गणेश चतुर्थी का पर्व मुख्य रूप से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है।
  • माना जाता है कि इसी दिन प्रथम पूज्य श्री गणेश का प्राकट्य हुआ था।
  • मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश धरती पर आकर अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
  • गणेश चतुर्थी की अवधि अनंत चतुर्दशी तक चलती है, इस दौरान गणपति धरती पर निवास करते हैं।

हर साल विघ्नहर्ता आते हैं और भक्तों के साथ रहकर उनके सुख-दुख का हिस्सा बनते हैं। मान्यता है कि इस दौरान गणपति अपने भक्तों के सभी दुख और परेशानियों का अंत कर देते हैं। लेकिन इसके लिए गणपति को प्रसन्न करना जरूरी है। तो आइए हम आपको गणेश चतुर्थी पर गणपति पूजन की विशेष विधि बताते हैं। इस विधि से पूजन करेंगे तो निश्चित ही प्रसन्न हो जाएंगे विघ्नहर्ता गणेश।

  • गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना दोपहर के समय करें, साथ में कलश भी स्थापित करें।
  • लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर मूर्ति की स्थापना करें।
  • इस मंत्र का उच्चारण करें – ”ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।”
  • दिन भर जलीय आहार ग्रहण करें या केवल फलाहार करें।
  • शाम के समय गणेश जी की यथा शक्ति पूजा-उपासना करें और उनके सामने घी का दीपक जलाएं।
  • गणपति को अपनी उम्र की संख्या के बराबर लड्डूओं का भोग लगाएं, उन्हें दूब भी अर्पित करें।
  • अंत में प्रसाद वितरित करें और अन्न-वस्त्र का दान करें।

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