संगरूर : पंजाब को कितना समझते हैं आप, क्या आप जानते हैं पंजाब हरे-भरे खेतों और हरियाली से इतर भी बसता है। जी हां, आज हम आपको एक ऐसे पंजाब से मिलवा रहे हैं जिसके दिल में कालिख पुती हुई है। ऐसा इसलिए कि इस पंजाब के संगरूर जिला का एक गांव है दंदीवाल, जहां जमींदारों ने करीब 15 दिनों से एक तरह से दलितों का सामाजिक बहिष्कार कर रखा है।
हालात ऐसे हैं कि दलितों को भूखे मरने की नौबत आ चुकी है। जमींदार रोटी देने को तैयार नहीं हैं। यहां तक कि अनाउंसमेंट करके दलितों का खाना-पीना और खेतों में घुसना बंद कर दिया गया है। भूख के मारे दलितों के मवेशी दम तोड़ रहे हैं। बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं और किसी को फिक्र नहीं है कि इनके पेटों तक अनाज पहुंचाया जाए।
दरअसल पंजाब के संगरूर जिले के दंदीवाल गांव के दिहाड़ी मजदूर दिहाड़ी और खाने को लेकर जमींदारों के सामने हैं। दलित खाना और अपना अधिकार मांग रहे हैं जबकि जमींदारों ने उन्हें भूखे मरने के लिए छोड़ दिया है। दलितों का दुख यहीं तक खत्म नहीं हुआ है, धान की बिजाई के बाद भी निर्धारित मजदूरी नहीं दी जा रही है। मजदूरी अगर दिया भी जा रहा है तो वो भी बिना खाने के।
दलित परिवारों से बात करने पर लिविंग इंडिया को जानकारी मिली कि उनसे निर्धारित समय से ज्यादा काम लिया जाता है। यहां तक कि समय पर मजदूरी भी नहीं मिलती है। मवेशियों के लिए हरा चारा उपलब्ध नहीं है। धमकी दी जाती है कि मजदूरी मांगने पर बेइज्जती की जाएगी। जमींदारों ने घोषणा कर दिया है कि दलितों को ना तो खाना दिया जाएगा और ना ही मजदूरी।
जिन जमींदारों पर आरोप लगा है उनका कहना है कि किसी से कोई झगड़ा नहीं है। दलितों को पूरी मजदूरी और खाने देने को तैयार थे, लेकिन वो उनके यहां काम करने से इंकार कर रहे हैं। किसी का बॉयकाट नहीं किया गया है। हमने सिर्फ इतना ही कहा है कि हम उन्हें रोटी नहीं दे सकते हैं। साफ शब्दों में बताया कि जो रेट तय किया गया है, उसी के अनुसार मजदूरी दी गई है।
खैर इस घटना के सामने आने के बाद पंजाब एससी कमीशन ने संगरूर के डीसी और एसपी से रिपोर्ट मांगी है। बाकायदा 8 अगस्त को मामले को कमीशन के सामने उपस्थित होकर पक्ष रखने को कहा गया है। लेकिन इस घटना ने पंजाब के चेहरे को पर वो धब्बा लगाया है, जिसका इलाज निकट भविष्य में संभव नहीं है। शायद पंजाब में इस घटना की गूंज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी।





