किसानों को डिफॉल्टर बनाना दुर्भाग्यपूर्ण- बादल

समराला: वैसे तो सरकार कई मुद्दों पर विपक्ष के निशाने पर है। लेकिन किसान कर्जमाफी का मुद्दा सरकार के लिए नासूर से कम नहीं। क्योंकि…

समराला: वैसे तो सरकार कई मुद्दों पर विपक्ष के निशाने पर है। लेकिन किसान कर्जमाफी का मुद्दा सरकार के लिए नासूर से कम नहीं। क्योंकि सरकार ने वादा तो कर लिया लेकिन अभी तक कर्जमाफ नहीं हुए आलम ये है कि रोजाना किसान खुदकुशी कर रहे हैं। हालांकि सरकार बार बार कह रही है किसानों का कर्जमाफ होगा लेकिन विपक्ष का कहना है कि सरकार झूठ बोल रही है और किसानों को गुमराह कर रही है। और ये मुद्दा तबसे और गर्म हो चुका है जबसे बैंकों ने कर्जाधारक किसानों को डिफॉल्टर बनाना शुरू किया है।

वैसे तो हमारा देश ही कृषि प्रधान देश है, और उसमें भी पंजाब, जिसे खेती में उन्नत प्रदेश माना जाता है। वो दीगर बात है कि अब पंजाब ही नहीं देश भर में कर्जतले किसान खुदकुशी कर रहे हैं। खैर अब किसानी की बात तो नहीं होती लेकिन राजनीति के लिए किसानों का ही इस्तेमाल हो रहा है। दरअसल पंजाब कि सियासत में किसान कर्जमाफी और किसानों की आत्महत्या पर सियासत गरमाई हुई है। पूर्व सीएम बादल के निशाने पर एक बार फिर कैप्टन और उनकी सरकार है। बादल ने कहा कि पहले से ही पता था कि ये झूठ बोल रहे है,लोगों को गुमराह कर रहे हैं

हालांकि किसानों पर राजनीति होना कोई नई बात नहीं है। लेकिन पंजाब में सरकार इसलिए सवालों के घेरे में ज्यादा है क्योंकि वादा जो कर्जमाफी का किया गया वो कर्ज तो माफ नहीं हुआ बल्कि बैंक वाले कर्जदार किसानों को डिफॉल्टर बनाकर अपने नोटिस बोर्ड पर उनकी फोटो चस्पा कर दी। बादल ने कहा कि किसानों को बेइज्जत किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

पंजाब में बिगड़ रही कानून व्यवस्था पर भी पूर्व सीएम बादल ने सरकार पर करारा हमला बोला बादल ने कहा कि अभी तो बहुत कुछ होना है

हालांकि सरकार किसानों का कर्जमाफ करने में अभी तक कामयाब नहीं हुई है। सत्ता में आते ही खजाना खाली होने की बात कही। और विधायकों की सैलरी बढ़ाने की बात हो रही है। मामले पर पूर्व सीएम बादल ने कहा कि पहले तो गरीब को देनी चाहिए जो उनकी जरूरत की चीजें हैं पहले वो मुहैया करवाई जानी जरुरी है, विधायक को तो कोई फर्क नहीं पड़ता गरीब को तो एक रूपये का भी फर्क पड़ता है।

दरअसल पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल समराला पहुंचे थे जहां अकाली दल के वरिष्ठ नेता के निधन पर शोक व्यक्त किया और सरकार को आड़े हाथ लिया। आपको बतादें की अकाली दल के वरिष्ठ नेता किरपाल सिंह खिरनिया का निधन 27 मई को निधन हुआ था।

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