दिल्ली : किसानों की आर्थिक हालत सुधारने, फसलों का न्यूनतम लाभकारी मूल्य देने और उन्हें समृद्ध बनाने के लिए जीएसटी कांऊसिल की तर्ज पर एक कृषि कांउसिल बननी चाहिए। इस कांऊसिल में न केवल किसानों का प्रतिनिधित्व हो बल्कि उनकी अपील-दलील सुनने के बाद ही फसलों का न्यूतम समर्थन मूल्य तय होना चाहिए। यह मांग इनेलो संसदीय दल के नेता व हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला ने गुरूवार को लोकसभा में रखी। उन्होंने नीति आयोग में भी किसान पृष्ठभूमि के सदस्यों की नियुक्ति भी मांग की। इनेलो सांसद ने कहा कि देश भर के किसानों का कर्ज माफ हो
दुष्यंत चौटाला ने केंद्रीय कृषि मंत्री के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें को लागू नहीं कर सकती। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि किसानों की फसलों का न्यूतनतम मूल्य तय करने के लिए जीएसटी कांउसिल की तर्ज पर पूरे देश के राज्य के कृषि मंत्रियों को एक मंच पर आना चाहिए और एक आयोग का गठन करना चाहिए। आयोग फसलों का न्यूनतम मूल्य तय करने से पहले आयोग में किसानों को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए। इसके बाद आयोग फसलों न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करे।
किसानों की दशा पर आयोजित चर्चा में भाग लेते हुए युवा सांसद ने कहा कि पिछले 60 वर्षों से हम सदन में किसानों की समृद्धि की बात कर रहे हैं परन्तु किसानों की दशा में सुधार नहीं हुआ। जब तक नीति निर्माण में किसानों की भागीदारी नहीं होगी, तब तक किसान समृद्ध नहीं हो सकते। उन्होंने सरकार से पूछा कि किसान की सोच के कितने व्यक्ति नीति आयोग में काम कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से नीति आयोग में किसानों की नियुक्ति बतौर सदस्य करने की मांग की।
दुष्यंत चौटाला ने किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा छह माह से बढ़ा कर एक वर्ष करने की मांग की। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गन्ने की फसल पक कर मार्केट में बेचने के बाद किसान की जेब में पैसे आने में एक वर्ष का समय लग जाता है तो वह क्रेडिट कार्ड के पैसे का भुगतान छह माह में कैसे करेगा। यदि किसान क्रेडिट कार्ड का पैसा जमा नहीं करवाया जाता तो उसकी जमीन कुर्क कर दी जाती है। सांसद दुष्यंत चौटाला ने कर्ज माफी की मांग करते हुए कहा कि पूरे देश में सरकार किसान का कर्ज माफ करे, इसके बाद वह डिफाल्टर होता है तो इसपर आगे की कार्रवाई हो।
