महिलाओं के नेतृत्व से मजबूत होगा लोकतंत्र और समावेशी विकास: विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर

चंडीगढ़/मोहाली, 20 अगस्त: पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और पंजाब के सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने आज…

पंजाब

चंडीगढ़/मोहाली, 20 अगस्त:

पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और पंजाब के सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने आज यूएन वुमेन द्वारा आयोजित ‘शीलीड्ज़ (SheLeads) राज्य वर्कशाप’ में शिरकत करते हुए महिला नेताओं को सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने और सामाजिक बदलाव का नेतृत्व करने का आह्वान किया।

समारोह को संबोधित करते हुए कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि महिला नेता अपने समुदायों में बदलाव लाने वाली ताकत हैं और वे ऐसी नीतियों और शासन प्रणाली को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, जो हर नागरिक की आकांक्षाओं और उम्मीदों को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी लोकतंत्र को और मजबूत बनाती है और समाज के हर वर्ग की आवाज को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने में मदद करती है।

मुख्य भाषण देते हुए पंजाब की कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि दुनिया कई ऐसी सामाजिक धारणाओं के अनुसार चलती है जो महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए हमेशा न्यायसंगत नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि समय की आवश्यकता है कि हम समाज को नए दृष्टिकोण से देखें और महिलाओं को बदलाव का नेतृत्व करने के लिए आगे आना चाहिए।

डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण, उनकी सामाजिक और आर्थिक प्रगति तथा हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

‘शीलीड्ज़’ यूएन वुमेन का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता विकसित करना, उनके नेटवर्क को मजबूत करना और उन्हें प्रभावी नेतृत्व के लिए तैयार करना है।

पंजाब में आयोजित इस दो दिवसीय आवासीय वर्कशाप में राज्य के विभिन्न हिस्सों से 47 महिला नेताओं ने भाग लिया, जिनमें जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाली कार्यकर्ता, चुनी हुई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। इनका चयन 117 प्राप्त आवेदनों में से किया गया।

पंजाब में ‘शीलीड्ज़’ का यह संस्करण इस पहल को राज्य स्तर तक विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे पहले राज्य स्तरीय वर्कशाप तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में आयोजित की जा चुकी हैं।

राष्ट्रीय स्तर की ‘शीलीड्ज़’ वर्कशापओं की शुरुआत फरवरी 2025 में हुई थी। शीलीड्ज़-I में 19 राज्यों की 29 महिला नेताओं, शीलीड्ज़-II में 22 राज्यों की 36 महिला नेताओं और शीलीड्ज़-III में 700 से अधिक आवेदनों में से चुनी गई 29 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के चेवनिंग फेलो और कौशल विकास क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. संदीप सिंह कौड़ा ने कहा कि महिलाओं का राजनीतिक नेतृत्व केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निर्णय लेने की प्रक्रिया में विविध अनुभवों और समावेशी सोच को शामिल करने का माध्यम है।

यूएन वुमेन इंडिया कंट्री ऑफिस की डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव कांता सिंह ने कहा कि हर महिला में नेता बनने की क्षमता होती है और आवश्यकता ऐसा वातावरण तैयार करने की है जो उसके नेतृत्व को प्रोत्साहित करे।

यूएन वुमेन के अनुसार, दुनिया भर में निर्णय लेने वाले पदों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी कम है। इसी संदर्भ में महिला राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए विभिन्न पहलकदमियाँ की जा रही हैं।

भारत द्वारा महिला आरक्षण कानून, 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पारित करना महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में कम से कम 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है।

‘शीलीड्ज़’ कार्यक्रम महिला नेताओं को संवाद, अनुभव साझा करने और विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के माध्यम से उनकी नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान करता है।

यूएन वुमेन महिलाओं के अधिकारों, लिंग समानता और सभी महिलाओं एवं लड़कियों के सशक्तिकरण के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख संस्था है। यह कानूनों, संस्थानों और सामाजिक व्यवहार में बदलाव के माध्यम से एक समान दुनिया के निर्माण के लिए प्रयासरत है।

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