ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: पिछले दो वर्ष से प्रदेश में सीएम एनाउंसमेंट के तहत चल रहे राहगिरी कार्यक्रम पर राज्य सूचना आयोग ने प्रदेश सरकार को इसमे पारदर्शिता के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने की सिफारिश की है। आयोग ने इन सिफारिशों पर सरकार से तीन माह में रिपोर्ट भी तलब की है। गत 4 फरवरी को मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल ने राहगिरी कार्यक्रम को चलाने के लिए सरकार को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने, आमद-खर्च का उचित रिकार्ड रखने, खातों का ऑडिट कराने व आयोजन कमेटियों के गठित करने आदि की सिफारिश की है। इन सिफारिशों को आरटीआई एक्ट के सैक्शन 25(5) के तहत गृह विभाग के एडिशनल चीफ सैक्रेटरी को भेजते हुए मुख्य सूचना आयुक्त ने तीन माह में की गई कारवाई की रिपोर्ट भी तलब की है। सिफारिशों के साथ आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा डीजीपी व एसपी पानीपत कार्यालय में इसी मुद्दे पर लगाई आरटीआई आवेदनों की प्रतियां भी भेजी हैं।
आरटीआई एक्टिविस्ट ने लगाए ये आरोप
पानीपत के आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि, पिछले 2 वर्षों से प्रदेश में राहगिरी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम में भारी धांधलियां चल रही हैं व जिला प्रशासन के अधिकारी शिक्षा माफिया, दलाल किस्म के लोगों को साथ लेकर भीड़ जुटाकर कार्यक्रम कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों में पारदिर्शता का भारी अभाव है। इसी सम्बंध में जानकारी लेने के लिए राहगिरी कार्यक्रम के उद्देश्य व लक्ष्य बारे व आमद-खर्च बारे उन्होंने एसपी पानीपत व डीजीपी कार्यालय में अलग-अलग आरटीआई आवेदन पिछले वर्ष लगाए थे।
आरटीआई के तहत दिए जवाबों में राहगिरी कार्यक्रम के उद्देश्य बारे डीजीपी व एसपी पानीपत कार्यालय के राज्य जन सूचना अधिकारियों ने कोई सूचना होने से इन्कार कर दिया। आरटीआई के तहत अन्य बिन्दुओं की सूचना भी नहीं दे पाए। गत 8 अप्रैल 2019 से 14 अक्टूबर 2019 तक प्रदेश में सभी एसपी को कुल 3.56,49,993/- रूपये की धनराशि राहगिरी कार्यक्रम के लिए पुलिस महानिदेशक द्वारा दी गई। लेकिन इसके खर्च का ब्यौरा डीजीपी कार्यालय के अधिकारी नहीं दे पाए। गत 4 फरवरी को केस की सुनवाई उपरांत अपने आदेशों में मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल ने आरटीआई एक्ट के सैक्शन 25(5)


