न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 67वें जन्मदिन पर रविवार को गुजरात के केवड़िया में सरदार सरोवर बांध को देश को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने सरदार सरोवर बांध के पास लगी पट्टिका का अनावरण किया। दरअसल इस बांध का शिलान्यास 5 अप्रैल 1961 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने किया था। लेकिन इसका काम 1987 में शुरू हो सका। इसके 56 साल बाद यह बांध देश को समर्पित किया जा रहा है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
ट्राइबल फ्रीडम फाइटर्स म्यूजियम का उद्घाटन
इसके साथ ही मोदी ने दभोई में नेशनल ट्राइबल फ्रीडम फाइटर्स म्यूजियम का उद्घाटन भी किया। साथ ही उपस्थित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरदार सरोवर बांध को पसीने से बनाया गया है। पुराने दिनों को याद करते हुए मोदी ने जिक्र किया कि कभी वो बस तो कभी स्कूटर से यहां आते थे, कभी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की तो कभी जनसभा को संबोधित किया। लेकिन दभोई में ऐसा नजारा पहली बार देखने को मिला है। यहां मौजूद विराट जनसमूह सरदार सरोवर बांध की महत्ता का गवाह है। मोदी ने जिक्र किया कि सरदार पटेल और बाबा साहब अंबेडकर कुछ समय और जिंदा रहते तो यह बांध पहले ही बन गया होता।
पानी की कमी देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा
जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि विराट जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि हमारी मां नर्मदा के प्रति कितनी भक्ति है। आज विश्वकर्मा जयंती है और भारत में सदियों से उपासक निर्माण में जुटे हुए हैं, उन्हें विश्वकर्मा के रूप में देखा जाता है। भगवान विश्वकर्मा के उपासकों ने सरदार सरोवर डैम का निर्माण किया है। इन्हीं उपासकों के कारण देश को सरदार सरोवर डैम मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मोदी ने पानी की कमी को देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए विश्व बैंक पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक ने पर्यावरण का हवाला देते हुए फंड देने से मना कर दिया, लेकिन आज बांध देश को जनता को समर्पित कर दिया है।
एक नजर में सरदार सरोवर बांध से जुड़े तथ्य
- नर्मदा नदी पर बना यह बांध 138.68 मीटर ऊंचा और 1210 मीटर लंबा है।
- बांध से 6 हजार मेगावाट बिजली पैदा होगी, जिसका 57 फीसदी हिस्सा मध्यप्रदेश, 27 फीसदी महाराष्ट्र और 16 फीसदी गुजरात को मिलेगा।
- 4.73 मिलियन क्यूसेक पानी की क्षमता वाले इस बांध को बनाने में 86.2 लाख क्यूबिक मीटर कंक्रीट लगा है।
- बांध से गुजरात के 15 जिलों के 3137 गांवों की 18.45 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी।
- इतने कंक्रीट का इस्तेमाल करके धरती से चांद तक सड़क बनाई जा सकती है।
- बांध के निर्माण में करीब 65 हजार करोड़ रूपये की लागत आई है।
- 1987 में शुरू हुआ बांध का निर्माण और यह 28 साल में पूरा हुआ।
- बांध से गुजरात के 10 हजार गांवों में पहुंचेगा नहरों के माध्यम से पानी।
- सरदार सरोवर बांध में 30 गेट हैं, 450 टन वजनी प्रत्येक गेट को बंद करने में एक घंटे का वक्त लगेगा।
- यह बांध दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कंक्रीट ग्रैवटी डैम है।
- राजस्थान को सिर्फ सरदार सरोवर बांध से पानी मिलेगा।



