आरक्षण के लिए नौकरियां पदोन्नति नहीं- सुप्रीम कोर्ट

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण पर सुनवाई करते हुए कहा कि, सरकारी नौकरियों में पदोन्नति के लिए कोटा और आरक्षण…

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण पर सुनवाई करते हुए कहा कि, सरकारी नौकरियों में पदोन्नति के लिए कोटा और आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं है, शीर्ष अदालत ने कहा कि यह राज्यों को कोटा प्रदान करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है और राज्यों को सार्वजनिक सेवा में कुछ समुदायों के प्रतिनिधित्व में असंतुलन दिखाए बिना ऐसे प्रावधान करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं

दरअसल उत्तराखंड सरकार के लोक निर्माण विभाग में सहायक अभियंता सिविल पदों पर पदोन्नति में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्यों के लिए आरक्षण पर अपील पर दिए गए एक फैसले में, अदालत ने कहा कि कोई “मौलिक अधिकार” नहीं था जो इस तरह के दावों के लिए अनुमति देता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, इसमें कोई संदेह नहीं है कि राज्य सरकार आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। कोई मौलिक अधिकार नहीं है, जो किसी व्यक्ति को पदोन्नति में आरक्षण का दावा करने के लिए विरासत में मिले। अदालत द्वारा राज्य सरकारों को आरक्षण प्रदान करने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के फैसले को पलटा 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा 2012 के एक फैसले को पलट दिया जिसमें राज्य को निर्दिष्ट समुदायों को कोटा प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। उस समय वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, कॉलिन गोंसाल्वेस और दुष्यंत दवे ने तर्क दिया था कि राज्य में संविधान के अनुच्छेद 16 (4) और 16 (4-ए) के तहत एससी / एसटी की मदद करने का कर्तव्य था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *