ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया: नवरात्र का चौथा दिन देवी कुष्मांडा का होता है i देवी की पूजा उनके महामंत्र के बिना बिल्कुल न करें i वहीं, मां कुष्मांडा के बीजमंत्र का भी जाप कर सकते हैं i देवी को रात की रानी के फूल बेहद पसंद हैं देवी कुष्मांडा की श्रद्धा से पूजा करने से शारीरिक और मानसिक विकार दूर हो जाते है i
पूजा में फूल जरूर रखें i सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी-देवताओं की पूजा कीजिए i उसके बाद अन्य देवी-देवताओं की पूजा करें i इनके साथ ही देवी कुष्मांडा की पूजा कीजिए. पूजा की विधि शुरू करने से पहले देवी को रात की रानी के फूल चढ़ाएं. देवी कुष्मांडा की पूरी पूजा विधि, महामंत्र, बीजमंत्र और सूर्य को प्रसन्न करने वाले उपाय इस प्रकार जानिए i
कुष्मांडा देवी कौन हैं?
ये नवदुर्गा का चौथा स्वरुप हैं i अपनी हल्की हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कुष्मांडा पड़ा i ये अनाहत चक्र को नियंत्रित करती हैंi मां की आठ भुजाएं हैं इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहते हैं i ज्योतिष में मां कुष्मांडा का संबंध बुध ग्रह से है i
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