मोहाली : सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली में ग्रेट नवभारत मिशन फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रीय ध्वजारोहण और समर्पण समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कई जानी-मानी हस्तियां, शिक्षाविद, छात्र और यूनिवर्सिटी परिवार के लोग एक साथ आए और सबने मिलकर देशभक्ति, एकता और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपने संकल्प को साझा किया।
समारोह की गरिमा तीन प्रतिष्ठित हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति से और बढ़ गई। कुरुक्षेत्र से सांसद तथा फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष श्री नवीन जिंदल ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाई। वहीं, इंडिया ऑस्ट्रेलिया स्ट्रैटेजिक अलायंस (IASA) के अध्यक्ष डॉ. जगविंदर सिंह विर्क तथा श्री शुभम अग्रवाल, आईपीएस, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), फतेहगढ़ साहिब (पंजाब) ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुई। जैसे ही तिरंगा शान से फहराया गया, पूरा परिसर राष्ट्रीय गौरव की भावना से भर उठा। वहां मौजूद सभी लोग देश के प्रति सम्मान व्यक्त करने और भारत की आजादी व प्रगति के लिए बलिदान देने वाले शूरवीरों को याद करने के लिए एक साथ खड़े हुए।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि, कुरुक्षेत्र से सांसद एवं फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष श्री नवीन जिंदल ने प्रत्येक भारतीय को गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार दिलाने के अपने प्रेरणादायी संघर्ष की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में भारत लौटने के बाद उन्होंने गर्व के साथ तिरंगा फहराना शुरू किया, लेकिन उस समय उन्हें कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने लगभग एक दशक तक कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसका परिणाम 23 जनवरी 2004 को आए ऐतिहासिक सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के रूप में सामने आया। इस निर्णय ने राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक फहराने के अधिकार को प्रत्येक भारतीय का मौलिक अधिकार माना। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर युवाओं को संबोधित करते हुए श्री जिंदल ने जेन ज़ेड और युवा नेतृत्व से कड़ी मेहनत करने, सहयोग की भावना को अपनाने तथा ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली के संस्थापक व कुलाधिपति (चांसलर) एस. रशपाल सिंह धालीवाल ने कहा कि देशभक्ति सिर्फ कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे हमें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा, “तिरंगा केवल हमारी आजादी का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों के बलिदान, वर्तमान पीढ़ी की आकांक्षाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत भारत के वादे को दर्शाता है। हमारे युवाओं को ज्ञान, चरित्र, अनुशासन और देश के लिए अपने योगदान के जरिए इस विरासत को आगे बढ़ाना होगा।”
सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली के प्रबंध निदेशक (एमडी) अर्श धालीवाल ने भारत के विकास में शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “राष्ट्र निर्माण का असली मतलब हमारे युवाओं को बड़े सपने देखने, जिम्मेदारी से काम करने और निस्वार्थ भाव से सेवा करने के लिए सक्षम बनाना है। सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली में हमारा मकसद ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो भारत के बदलाव को सिर्फ देखें नहीं, बल्कि खुद उसके निर्माता बनें।”
समारोह में आए विशिष्ट अतिथियों ने भी छात्रों का मार्गदर्शन किया और उन्हें ईमानदारी, अनुशासन, साहस और सेवा के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनके विचारों ने युवाओं को यह समझाया कि आजादी के साथ-साथ देश की प्रगति में योगदान देने की जिम्मेदारी भी आती है। यह कार्यक्रम ‘नवभारत’ की सोच को समर्पित रहा, जिसने सभी को याद दिलाया कि एक विकसित और सशक्त भारत बनाने के लिए सामूहिक प्रयास, जिम्मेदार नागरिकता और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति निष्ठा बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम का समापन तिरंगे के सम्मान को सिर्फ आयोजनों में ही नहीं, बल्कि अपने कामों से बनाए रखने के संकल्प के साथ हुआ। यह समारोह देशभक्ति, राष्ट्र-स्मरण और भारत के उज्ज्वल भविष्य में योगदान देने के साझा संकल्प का एक सुंदर माध्यम बना।



