दिल्ली, 29 अक्टूबर
आज देश में करवाचौथ का त्योहार श्रद्धा और उत्साह से मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस त्योहार का बहुत महत्व है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिएस अच्छे स्वास्थय और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती है। सुबह महिलाएं सरगी खाकर व्रत की शुरूआत करती हैं। शाम के समय पूजा करने के बाद चांद को तर्पण कर व्रत खोलती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करवाचौथ की पूजा करने का शुभ समय शाम 5.30 बजे से लेकर 6.56 बजे तक है। इस दौरान महिलाएं करवा माता, भगवान गणेष और कार्तिकेय, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। पूजा करने के बाद करवा चौथ की व्रत कथा सुनी जाती है।
वीरावती और सात भाइयों की प्रसिद्ध व्रत कथा
करवा चौथ पर वीरावती और उसके सात भाइयों की कथा सुनने की परंपरा प्रचलित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, वीरावती अपने सात भाइयों की इकलौती बहन थी। विवाह के बाद उसने अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। दिनभर निर्जला व्रत रखने के कारण उसे शाम तक भूख-प्यास से परेशानी होने लगी।
बहन की हालत देखकर उसके भाइयों से यह देखा नहीं गया। उन्होंने एक पेड़ के पीछे दीपक जलाकर छलनी की मदद से ऐसा दृश्य बनाया, मानो चंद्रमा निकल आया हो। चंद्रमा निकलने की बात मानकर वीरावती ने व्रत खोल लिया। लेकिन व्रत अधूरा रहने के कारण उसे अपने पति के संकट में पड़ने का समाचार मिला।
इसके बाद वीरावती ने पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ व्रत की परंपराओं का पालन किया। उसकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर देवी की कृपा हुई और उसके पति के जीवन में फिर से खुशहाली लौट आई। तभी से करवा चौथ पर इस कथा को सुनने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।
करवा चौथ प्रेम विश्वास, समर्पण का त्योहार है। महिलाएं इस अवसर पर सोलह श्रृंगार करती हैं।



