न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : अंतरिक्ष क्षेत्र में मुकाम हासिल कर चुकी ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के लिए गुरूवार का दिन काफी अहम रहने वाला है। दरअसल ISRO IRNSS-1H सेटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजेगा। इसी साल फरवरी में 7 देशों का 104 सेटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ चुके ISRO ने IRNSS-1H के लिए पहली बार प्राइवेट कंपनियों के साथ भागीदारी की है। 1425 किग्रा वजनी IRNSS-1H सेटेलाइट IRNSS-1A की जगह लेगा। ISRO गुरूवार की शाम सात बजे IRNSS-1H को अपने सबसे भरोसेमंद लॉन्चिंग व्हीकल PSLV-C 39 रॉकेट से छोड़ेगा। दरअसल IRNSS-1A सेटेलाइट की परमाणु घड़ी ने काम करना बंद कर दिया था, इसलिए नये सेटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा जा रहा है।
पहली बार निजी कंपंनियों की भागीदारी
IRNSS-1H सेटेलाइट छोड़ने के लिए ISRO ने पहली बार प्राइवेट कंपनियों को सीधे तौर पर शामिल किया है। इसमें प्राइवेट कंपनियों की 25% भागीदारी रखी गई है। इसके लिए 6 कंपंनियों का ग्रुप बनाया गया और इसके 70 लोगों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। कंपनियों के ग्रुप को अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज ने लीड किया है। वहीं बेंगलुरू की तीन और मैसूर के साथ ही हैदराबाद की एक-एक कंपनियों शामिल रही हैं। छह महीने की कड़ी मेहनत के बाद IRNSS-1H को बनाने में सफलता हासिल हुई। ISRO ने सेटेलाइट के सिर्फ कंपोनेंट की असेम्बलिंग और टीम को गाइड किया है। ISRO की कोशिश है कि प्राइवेट कंपंनियों को साथ जोड़कर आय में बढ़ोत्तरी की जाए।
IRNSS-1H से जुड़ेगा नया अध्याय
IRNSS-1H सेटेलाइट की लॉन्चिंग के साथ ही ISRO की सफलता में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा। इस सेटेलाइट से सबसे ज्यादा मदद सुरक्षा से जुड़े मसलों पर मिलेगी। IRNSS-1H नेविगेशन सेटेलाइट है और इसकी मदद से भारत 1500 किमी के इलाके पर नजर रखने में सक्षम हो सकेगा। वहीं इससे नेविगेशन में भी मदद मिलेगी। दरअसल भारत के समूचे इलाके पर नजर रखने के लिए 25 से 30 सेटेलाइट की जरूरत है। इस जरूरत को पूरी करने के लिए ISRO ने प्राइवेट कंपंनियों का हाथ थामा है ताकि सेटेलाइट के निर्माण में तेजी लाई जा सके। ISRO प्राइवेट कंपंनियों के पहले सेटेलाइट रॉकेट को भी साल 2020 तक छोड़ने की तैयारी कर रहा है।
‘IRNSS-1H’ की खासियत
- 1425 किग्रा वजनी यह सेटेलाइट IRNSS-1A की जगह लेगा
- सेटेलाइट में निजी कंपंनियों का 25% सहयोग
- 6 प्राइवेट कंपंनियों को किया गया शामिल
- सेटेलाइट से नेविगेशन में मिलेगी मदद
- 1500 किमी के इलाके पर नजर रखी जा सकेगी
- सुऱक्षा के साथ अन्य जरूरतें करेगा पूरी
