Indore Contaminate Water Crisis:
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी पिने (Indore Contaminate Water) से अब तक 14 लोगों की मौतों हो गई है. रिपोट्र्स के मुताबिक, इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में उल्टी, दस्त और डायरिया की वजह से छह महीने के बच्चे समेत कुल 14 लोगों की जान जा चुकी है. दूषित पानी को पीने की वजह से 1300 से ज्यादा लोग अभी भी बीमार हैं, जबकि 100 से ज्यादा लोग अलग-अलग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं.
Indore Contaminate Water; 2022 में किया था अलर्ट-
सवाल उठने लगे हैं कि मध्य प्रदेश में यह क्या हो रहा है. इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है. सरकार नीचे के दो-चार अधिकारियों को सस्पेंड कर खानापूर्ति कर लेती है. मगर जिम्मेदारी तय नहीं होती है. ये मौतें, आपदा नहीं, सरकार की नाकामी की वजह से हुई है. 2022 में ही इंदौर को यह अलर्ट किया गया था. ड्रेनज में पाइप लाइन डालने से हादसा हो सकता है. लेकिन नगर निगम और स्थानीय प्रशासन इसे इग्नोर करती रही. ड्रेनज के अंदर ही पानी का लाइन डाल दिया. अब परिणाम सबके सामने हैं.
भाजपा ने शहर को जहरीला पानी और मौतें दीं-
इन सब के बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में दूषित पानी से लगातार हो रही मौतों पर भाजपा और सरकार को घेरा. गुरुवार को राजधानी में मीडिया से बात करते हुए कहा कि दूषित पानी पीने से 14 लोगों की मौत हो गई लेकिन अभी तक दोषी अधिकारियों और जिद्ब्रमेदार जनप्रतिनिधियों पर कोई सपत कार्रवाई नहीं हुई है. यह भाजपा सरकार की घोर संवेदनहीनता और संख्या के अहंकार को दिखा रहा है.
पटवारी ने कहा, इंदौर ने भाजपा को जनता ने सांसद, 9 विधायक, महापौर और पूरा नगर निगम दिया. बदले में भाजपा ने शहर को जहरीला पानी दिया और मौतें दीं. मामले में लापरवाहों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए. इंदौर के महापौर भी इस प्रशासनिक विफलता के लिए जिद्ब्रमेदार हैं. जीतू ने मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग भी सीएम से की.



