न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : सुशासन देने का दम भरने वाली खट्टर सरकार के राज में दो वर्ष पूर्व नियमित हुई कॉलोनियों का विकास भले ही ना हुआ हो। लेकिन दुरूस्त सडक़ों को तोडक़र बनाने में नगर परिषद के अधिकारी जरूर दिलचस्पी ले रहे हैं। हालात यह है कि अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारियों व प्रभावशाली पार्षदों की मिलीभगत के चलते जनता की गाढ़ी कमाई को ठिकाने लगाया जा रहा है। हो भी क्यों नहीं, नगर पर्षद के अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों का संरक्षण भी प्राप्त है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि यह कहना है रेवाड़ी की शक्ति नगर कॉलोनी के उन लोगों का, जिनके घरों के आगे इन दिनों सही सलामत सड़कों पर धड़ल्ले से जेसीबी चलाई जा रही है।
तस्वीरों में आप जिन सड़कों पर जेसीबी चलती देख रहे हैं, ये वही सड़कें हैं, जिन्हें लेकर करीब दो माह पूर्व नगर परिषद ने टेंडर निकाले थे। हैरान करने वाली बात यह है कि शहर की क्षतिग्रस्त और दो वर्ष पूर्व नियमित हुई कॉलोनियों की कच्ची सडक़ों के निर्माण को लेकर नगर परिषद का कोई ध्यान नहीं है। लोगों का कहना है कि यह सडक़ पूरी तरह ठीक थी। जबकि हाल ही में बनाई गई सड़कों से रोड़ियां निकलनी शुरू हो गई है। ऐसे में यह कहने से गुरेज नहीं किया जा सकता कि सड़कों के निर्माण की आड़ में परिषद खुद की जेब गर्म करने के चक्कर में दुरूस्त सड़कों खस्ताहाल बताकर उन पर पीला पंजा चलाया जा रहा है।
हालांकि सरकार के प्रतिनिधि भी दबी जुबान में इसे गलत मान रहे हैं। उनका कहना है कि इस बारे में उन्हें भी शिकयतें मिल रही हैं। फिर भी सच क्या है, यह जानने के लिये मामले की जांच कराई जाएगी। दूसरी तरफ पार्षद यह कह रहे हैं कि सड़कों का निर्माण लोगों की डिमांड पर कराया जा रहा है, वहीं अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि सीवरेज सिस्टम चालू होने से पहले इन गलियों में गड्ढे होने के कारण सडक़ें कई जगहों से धंस गई थी। मगर आगे के लिए हिदायत दी गई हैं कि बिना चैक किए किसी भी सडक़ निर्माण नहीं कराया जाएगा। दरअसल नगर परिषद में इन दिनों अधिकारियों की मनमानी सिर चढ़कर बोल रही हैं। ऐसे में परिषद की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठना लाजमी है।



