अंबाला, 29 सितंबर
अंबाला की बुआवा अनाज मंडी में धान की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन बरसात ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसानों ने आरोप लगाया है कि मंडी में तिरपाल की कोई व्यवस्था नहीं है। किसान अपना अनाज बचाने के लिए खुद तिरपाल लेकर आते हैं। मंडी में रखी जीरी की बोरियां और सड़क पर सुखाई जा रही जीरी बरसात में पूरी तरह से गीली हो गई है।
किसानों का आरोप- इस बार खरीद लेट शुरू
किसान महेंद्र सिंह औजला का कहना है कि पिछली बार सरकार ने 22 सितंबर से जीरी की खरीद शुरू कर दी थी, लेकिन इस बार खरीद काफी लेट शुरू की गई। इसी लेट-लतीफी के कारण किसानों की फसल मंडी में खुले में पड़ी रही और बरसात में भीग गई। उन्होंने मंडी प्रशासन पर आरोप लगाया कि प्रशासन केवल बातें करता है, जमीन पर कोई व्यवस्था नहीं है।
किसानों की फसल बर्बाद
मौसम खराब देख आढ़तियों ने तिरपाल डालकर ट्राली तो बचा ली, लेकिन उसके बाद हुई तेज बरसात ने मंडी में सड़क पर सूखने के लिए रखी गई जीरी को पूरी तरह भिगो दिया।किसानों का कहना है कि 15 सितंबर से ही जीरी मंडियों में आनी शुरू हो जाती है। अगर सरकार समय पर खरीद शुरू कर देती तो आज उनका सोने जैसा अनाज बर्बाद होने से बच जाता। किसानों को आशंका है कि अब 3 से 4 दिन तक उनकी गीली हुई फसल की खरीद नहीं हो पाएगी, जिससे उन्हें और नुकसान झेलना पड़ेगा।
फसल को तिरपालों से ढका गया था- मार्केट कमेटी सचिव
दूसरी तरफ मार्केट कमेटी के सचिव का कहना है कि मंडी में आई जीरी की फसल को अच्छी तरह से तिरपालों से ढक दिया गया था। उन्होंने माना कि मंडी में कुछ जगहों पर बरसात का पानी रुका हुआ है, लेकिन बाकी सारी मंडी को क्लियर करवा दिया गया है। उनका दावा है कि कल पूरे मंडी का जायजा लेकर अनाज को ढकवाया गया था।लेकिन सवाल यही है कि अगर अनाज ढका था तो किसानों की हजारों क्विंटल जीरी भीगी कैसे? फिलहाल किसान सरकार से जल्द खरीद शुरू करने और गीली हुई फसल का उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
अन्य खबरें जानें-
Asian Games 2026: नीरू ढांडा ने जीता शूटिंग में गोल्ड मेडल, देश की झोली में आया 5वां गोल्ड



