#DurgaPuga : 21 से 29 सितंबर तक नवरात्रि, पहले दिन मां के शैलपुत्री रूप की आराधना

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : महालया के साथ 21 सितंबर से नवरात्रि शुरू होने वाली है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है जिसका मतलब नौ रातें होती…

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : महालया के साथ 21 सितंबर से नवरात्रि शुरू होने वाली है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है जिसका मतलब नौ रातें होती हैं। इस दौरान मां दुर्गा के शैलपुत्री, ब्रह्माचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री रूपों की पूजा होती है।  मां के हर रूपों की अपनी महिमा है। भारत के विभिन्न राज्यों में नवरात्रि को लेकर विशेष चहल-पहल रहती है। सबसे ज्यादा आकर्षण कोलकाता में देखने को मिलता है, जहां दस दिनों तक विशेष आराधना होती है। वहीं कुल्लू के दशहरे की भी अपनी खासियत है।

एक साल में पांच बार नवरात्रि

अधिकांश लोग शारदीय नवरात्र को ही जानते हैं, लेकिन एक साल में पांच बार नवरात्रि मनाई जाती है। इनके नाम वासंतिक नवरात्रि, आषाढ़ा नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि, पौष नवरात्रि, माघ नवरात्रि है। हालांकि शारदीय के साथ ही वासंतिक नवरात्रि देश के विभिन्न हिस्सों में घूमधाम से मचाई जाती है। सबसे ज्यादा उल्लास शारदीय नवरात्रि को लेकर होता है। यह सितंबर से लेकर अक्टूबर के बीच होता है। दरअसल शारदीय नवरात्र शरद मास में शुरू होता है, जो सर्दी के मौसम की शुरूआत होती है।

महिषासुरमर्दिनी मां दुर्गा की आराधना

दुर्गा पूजा यानि मां देवी के नौ विविध रूपों की आराधना। मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का संहार किया था। दरअसल महिषासुर राक्षस ने भगवान शिव से अमरत्व का वरदान लिया था। जिसके बाद महिषासुर का अत्याचार बढ़ता गया। महिषासुर के मर्दन के लिए मां दुर्गा अवतरित हुई थीं। महिषासुर उनकी सुंदरता पर मुग्ध हो गया और शादी का प्रस्ताव रखा। मां दुर्गा ने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, लेकिन युद्ध में हराने की शर्त रख दी। महिषासुर-मां दुर्गा के बीच नौ दिनों तक युद्ध हुआ और आखिर में मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया।

21 से 39 सितंबर तक नवरात्र

इस बार नवरात्र 21 से 30 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस दौरान मां के नौ विविध रूपों की आराधना होगी। जबकि 30 सितंबर को विजयादशमी होगी। 21 सितंबर को घटस्थापना या कलश स्थापना होगा। इसके साथ ही मां दुर्गा को निमंत्रण दिया जाता है। इस बार कलश स्थापना का समय सुबह 6.13 से 8.10 बजे तक रहेगा। सबसे खास होती है अखंड दिया, जो नौ दिनों तक जलता रहता है। वहीं लोग नौ दिनों तक फलाहार भी करते हैं। नौंवे दिन कुंवारी पूजन होती है, जबकि विजयादशमी को विधिवत पूजा के साथ मां को विदाई दी जाती है।

इस बार के नवरात्रि का तिथियां

21 सितंबर – प्रतिपदा – कलश स्थापन, चंद्रदर्शन

मां के रूप शैलपुत्री की पूजा।

22 सितंबर – द्वितीया

मां के रूप ब्रह्मचारिणी की पूजा।

23 सितंबर – तृतीया

मां के रूप चंद्रघंटा की पूजा।

24 सितंबर – चतुर्थी

मां के रूप कूष्मांडा की पूजा।

25 सितंबर – पंचमी

मां के रूप स्कंदमाता की पूजा।

26 सितंबर – षष्ठी

मां के रूप कात्यायनी की पूजा।

27 सितंबर – सप्तमी

मां के रूप कालरात्रि की पूजा।

28 सितंबर – अष्टमी

दुर्गा अष्टमी, मां महागौरी की पूजा।

29 सितंबर – नवमी

महानवमी। मां सिद्धिदात्री की आराधना।

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