Faridabad के ESIC मेडिकल कॉलेज में 35 घंटे ड्यूटी करने के बाद बीमार पड़ा डॉक्टर ,अस्पताल में नहीं मिला इलाज

फरीदाबाद, 21सितंबर फरीदाबाद के ESIC मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में चिकित्सा व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल के…

फरीदाबाद

फरीदाबाद, 21सितंबर

फरीदाबाद के ESIC मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में चिकित्सा व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों ने संस्थान के डीन को एक कड़ा पत्र लिखकर जनरल सर्जरी विभाग के एक पीजी रेजिडेंट डॉक्टर के साथ हुए अमानवीय और लापरवाह रवैये पर गहरा रोष व्यक्त किया है। घटना शनिवार 19 सितंबर 2026 की है, जब एक डॉक्टर ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से बीमार पड़ गया, लेकिन अस्पताल के भीतर ही उसे समय पर इलाज और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाईं।

क्या है पूरी घटना ?

पीड़ित रेजिडेंट डॉक्टर ने पिछले 48 घंटों में से लगभग 35 घंटे ड्यूटी की थी। ऑपरेशन थिएटर में ड्यूटी के दौरान अचानक उन्हें गंभीर कमजोरी महसूस हुई, जो बढ़ते-बढ़ते ‘क्वाड्रीपारेसिस’ – हाथ-पैर में सुन्नपन और कमजोरी) में बदल गई। अपनी ही जान बचाने और इलाज पाने के लिए डॉक्टर को अस्पताल के भीतर ही भारी संघर्ष करना पड़ा।

अस्पताल प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप

रेजिडेंट डॉक्टरों ने पत्र में अस्पताल प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। OT से इमरजेंसी वार्ड तक शिफ्ट करने के लिए 90 मिनट तक कोई नर्सिंग ऑफिसर उपलब्ध नहीं हुआ।

बुनियादी उपकरणों का अभाव

पूरे अस्पताल में ‘सर्वाइकल हार्ड कॉलर’ तक उपलब्ध नहीं था, जिसे अंततः ‘ब्लिंकिट’ के जरिए मंगाना पड़ा। इमरजेंसी का अनुरोध करने के बावजूद ब्लड रिपोर्ट में 3 घंटे की देरी की गई और KFT प्रोटोकॉल का हवाला देकर MRI में भी विलंब किया गया।

एम्बुलेंस और डॉक्टर नदारद

अस्पताल की तरफ से कोई एम्बुलेंस मुहैया नहीं कराई गई, जिसके चलते निजी अस्पताल से एम्बुलेंस बुलानी पड़ी। इसके अलावा प्राथमिकता के आधार पर कोई न्यूरोलॉजी या न्यूरोसर्जरी कंसल्टेंट भी उपलब्ध नहीं हो सका।  हद तो तब हो गई जब MRI -संगत स्ट्रेचर के लिए भी मोलभाव करना पड़ा।

अन्य डाक्टरों ने कहा कि यदि अस्पताल अपने डॉक्टरों की सुरक्षा नहीं कर सकता, तो उसे मरीजों की सेवा कराने का भी नैतिक अधिकार नहीं है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने डीन से 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब और एक्शन टेकन रिपोर्ट की मांग की है, ऐसा न करने पर सामूहिक रूप से बड़े स्तर पर कदम उठाने की चेतावनी दी है। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों के ड्यूटी ऑवर्स और सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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