देहात में दिखी दिल्ली ट्रैड फेयर की झलक

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया: देहात में दिखी दिल्ली ट्रैड फेयर की झलक * चावल जितनी छोटी और नौ फीट लंबी जूती बनाने में विश्व रिकार्ड बना…

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया: देहात में दिखी दिल्ली ट्रैड फेयर की झलक

* चावल जितनी छोटी और नौ फीट लंबी जूती बनाने में विश्व रिकार्ड बना चुका पटियाला व्यापारी
* सिद्ध बाबा राजपुरी डेरे में पारंपरिक एवं स्वदेशी मेले ने प्राचीन विरासत को किया जिंदा

बात्ता गांव स्थित सिद्ध बाबा राजपुरी जी धार्मिक डेरे में दशहरा पर्व उपलक्ष्य में दो दिवसीय पारंपरिक एवं स्वदेशी मेले में राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले ट्रैड फेयर की झलक नजर आई। चावल जितनी छोटी और नौ फीट लंबी जूती बनाने में विश्व रिकार्ड बना चुके पटियाला निवासी बुधराम का स्टाल हर किसी के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।उन्होंने बताया कि 9 फीट की बनाने में 45 और चावल साइज की जूती बनाने में 8 दिन का समय लगा। हूनर के इस बादशाह को पंजाब सरकार द्वारा 1992 में स्टेट अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। जब भी देश-दुनिया में कहीं मेला लगाता है तो उसे निमंत्रण मिलता है। इसके अलावा मेले में खादी वस्त्रों, जूती निर्माण क्षेत्र में देश-दुनिया में नाम कमा चुके बुधराम पटियाला का स्टाल, मिट्टी से बने बर्तनों, घर के सजावटी सामान, देसी घी से बनी मिठाईयोंं के साथ-साथ घरों में इस्तेमाल होने वाला सामान शामिल है।

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देश प्रेम की लौ जगाने के साथ-साथ प्राचीन विरासत को समृद्ध करने की इस नई पहल की शुरूआत भाजपा प्रांतीय उपाध्यक्ष धर्मपाल शर्मा ने सिद्ध बाबा राजपुरी महंत एवं जूना अखाड़ा महामंत्री बाबा सोमपुरी की अगुवाई में की। इसके साक्षी देश भर से बड़ी तादाद में आए बड़े-बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और बच्चे बने। शर्मा ने कहा कि देश प्रेम की भावना को मजबूत करने का जो अभियान डेरे से शुरू किया गया है वह जन-जन को जगाने का काम करेगा।

विशाल पंडाल में सजे स्वदेशील मेले में देश की राजधानी दिल्ली में लगने वाले ट्रैड फेयर की हू-ब-हू झलक दिखी। इसमें खादी वस्त्रों, जूती निर्माण क्षेत्र में देश-दुनिया में नाम कमा चुके बुधराम पटियाला का स्टाल, मिट्टी से बने बर्तनों, घर के सजावटी सामान, देसी घी से बनी मिठाईयोंं के साथ-साथ घरों में इस्तेमाल होने वाला सामान शामिल है। महंत बाबा सोमपुरी के कुशल रोड मैप पर ग्रामीण स्तर पर पहली बार इस प्रकार के कार्यक्रम देखकर लोग बेहद उत्साहित नजर आए। सांस्कृतिक मंच, खेल प्रतियोगिताओं, विशाल भंडारे व अन्य प्रदर्शनियों के लिए बड़े रकबे को कवर किया गया है।

धार्मिक राजपुरी डेरे में श्रद्धालुओं की सेहत के मद्देनजर सुविधा जनक ढंग से अलग-अलग पंडालों में आयोजित भंडारे में देसी घी-सक्कर, पूरी, सब्जियां और जैविक पद्दति से तैयार किए गए अन्य व्यंजन परोसे गए। महिलाएं लोकगीत गाती हुई आयोजन स्थल पर पहुंची।
जूना अखाड़ा महामंत्री महंत सोमपुरी जी महाराज ने कहा कि जागृति लाने में धार्मिक डेरों की अहम भूमिका है। इसके  लिए सर्व प्रथम डेरामुखियों का संस्कारों की डोर से बंधे रहना नितांत जरूरी है। आदर्श सोच आत्मसात कर जन सेवा करने वाले संत-महंतों को अलग से किसी प्रकार की सिक्योरिटी की जरूरत नहीं होती।

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