ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का दूसरा बजट 1 फरवरी यानी आज थोड़ी ही देऱ में पेश होने वाला है। इस बजट के जारिए जहां कई लोगों को राहत मिलने वाली हैं. तो वहीं कई लोग ऐसे भी होने वाले हैं जिन्हें जोरदार झटका लगाने वाला हैं। ये सब बताने से पहले हम आपको बताते हैं कि आखिर बजट है क्या?
संविधान में ‘बजट’ शब्द का जिक्र नहीं है जिसे बोलचाल की भाषा में आम बजट कहा जाता है उसे संविधान के आर्टिकल 112 में एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट कहा गया है। फाइनेंशियल स्टेटमेंट अनुमानित प्राप्तियों और खर्चों का उस साल के लिए सरकार का विस्तृत ब्योरा होता है। आम बजट में सरकार की आर्थिक नीति की दिशा दिखाई देती है। इसमें मंत्रालयों को उनके खर्चों के लिए पैसे का आवंटन होता है। बड़े तौर पर इसमें आने वाले साल के लिए कर प्रस्तावों का ब्योरा पेश किया जाता है।सरल शब्दों में कहें तो, सरकार की आय एवं व्यय का एक विवरण जिस प्रपत्र में एकत्रित किया जाता है, उसे बजट कहते है।
आने वाला केंद्र सरकार का बजट कैसा हो इस बारे में लोगों ने अलग-अलग तरीके से अपनी राय रखी। हर वर्ष की तरह इस बार भी 1 फरवरी को केंद्र सरकार के आम बजट को लेकर लोगों में काफी उम्मीदें हैं। जहां व्यापारी इनकम टैक्स स्लैब को बढ़ाने के साथ-साथ जीएसटी के स्लैब कम करने की बात कर रहे हैं। वही अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य, शिक्षा, जीडीपी रेट की तरफ ध्यान देना चाहिए ताकि हर व्यक्ति को इसका लाभ मिल सके । चाहे वह व्यापारी हो दुकानदार हो, आम नागरिक हो या फिर सरकारी अधिकारी के साथ-साथ रिटायर्ड कर्मचारी हो। सरकार को इस बजट में गृहणियों की रसोई का भी खासकर ध्यान रखना होगा जिससे उनकी रसोई का बजट न बिगडे। कैटरिंग का व्यापार करने वाले अजय बवेजा का कहना है कि लोगों को सरकार के इस बजट से बहुत उम्मीदें हैं जिससे आम आदमी भी उम्मीद रखता है कि आने वाला बजट उसके हक में हो।
लेकिन इस साल बजट में आयकर कटौती की उम्मीदों को झटका लग सकता है। अर्थव्यवस्था में जारी नरमी के कारण चालू वित्त वर्ष में कर से प्राप्त राजस्व लक्ष्य की तुलना में दो लाख करोड़ रुपये कम रह सकता है। इसके कारण वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास बजट में व्यक्तिगत आयकर में कटौती के विकल्प सीमित हो गए हैं।



