जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कानून’ को मजबूत करने के लिए सात सदस्यीय कमेटी के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करेंगे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

चंडीगढ़, 26 सितंबर: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ में संशोधनों की समीक्षा करने और सुझाव देने…

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चंडीगढ़, 26 सितंबर: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ में संशोधनों की समीक्षा करने और सुझाव देने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित पैनल के साथ समन्वय के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित सात सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करेंगे। यह बैठक रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर होगी और इसमें कानून को और मजबूत करने के लिए आगामी कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रस्तावित संशोधनों में सभी कानूनी और प्रक्रियात्मक पहलुओं को व्यापक रूप से शामिल किया जाए।

राज्य सरकार द्वारा गठित इस उच्चस्तरीय कमेटी में श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल के प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जसपाल सिंह, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गुरबीर सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त) जतिंदर सिंह औलख और लॉ अफसर प्रीत इंदर पाल सिंह शामिल हैं।

इस संबंध में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारी सरकार एक मजबूत कानून बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जो श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करने के बारे में सोचने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए प्रभावी रोक के रूप में काम करेगा। अतीत में हुई बेअदबी की घटनाओं ने लाखों लोगों की भावनाओं और मानसिकता को गहरी ठेस पहुंचाई है और यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता और मर्यादा पूरी तरह सुरक्षित रहे।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं परमात्मा का आभारी हूं कि मुझे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा और पवित्रता की रक्षा के लिए समर्पित कानून लाने का अवसर मिला। यह विधेयक कानूनी विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया था, जिसका स्पष्ट उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इसमें ऐसी कोई कानूनी कमी न रह जाए, जिसका भविष्य में इसकी प्रभावशीलता को कमजोर करने के लिए दुरुपयोग किया जा सके।”

उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि कानून व्यापक, पुख्ता और समय की कसौटी पर खरा उतरने में सक्षम हो। कोई भी व्यक्ति बेअदबी के कृत्य की जवाबदेही से बचने के लिए किसी कानूनी कमी का लाभ न उठा सके। कानून के हर पहलू की बहुत सावधानी से समीक्षा करने की आवश्यकता है, ताकि इसके उद्देश्य को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सके।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सात सदस्यीय कमेटी श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित पैनल से परामर्श करके कानून के हर पहलू की समीक्षा करेगी और राज्य सरकार को बहुमूल्य मार्गदर्शन प्रदान करेगी। प्रस्तावित संशोधनों पर व्यापक चर्चा की जाएगी, ताकि सभी कानूनी और प्रक्रियात्मक पहलुओं का उचित समाधान किया जा सके।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से जुड़ी भावनाओं का पूरा सम्मान करते हैं और यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कि कानून बेअदबी के विरुद्ध सबसे मजबूत ढांचा प्रदान करे। साथ ही प्रस्तावित संशोधनों को पूरी संवेदनशीलता, जिम्मेदारी तथा संवैधानिक एवं कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप आगे बढ़ाया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “उद्देश्य स्पष्ट है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता पूरी तरह बरकरार रहे और कानून अपने उद्देश्य को प्रभावी ढंग से पूरा करे। मुझे उम्मीद है कि समिति का विचार-विमर्श सिख पंथ की भावनाओं के अनुरूप परिणाम देगा और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा के लिए कानूनी ढांचे को और मजबूत करेगा।”

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