CITU Protest: ऊना में डोनाल्ड ट्रंप पुतला फूंका, वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के विरोध में सीटू का प्रदर्शन, अमेरिका की नीतियों के खिलाफ

CITU Protest Burnt Trump Effigy: अमेरिका की कथित दखलअंदाजी और साम्राज्यवादी नीतियों के विरोध में सोमवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला.…

CITU Protest Burnt Trump Effigy:

अमेरिका की कथित दखलअंदाजी और साम्राज्यवादी नीतियों के विरोध में सोमवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला. ट्रेड यूनियन सीटू (CITU) की जिला इकाई ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के मुद्दे को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनका पुतला फूंका.

प्रदर्शन के दौरान पूरे इलाके में अमेरिका विरोधी नारों से माहौल गरमा गया. सीटू नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अमेरिका लगातार दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है. उनका कहना है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति के खिलाफ की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है. सीटू ने इसे एक संप्रभु देश की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की साजिश बताया.

पुतला दहन कर जताया विरोध-

ट्रेड यूनियन सीटू की जिला इकाई के बैनर तले बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पर एकत्र हुए. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप का पुतला फूंका और “अमेरिका मुर्दाबाद” तथा “साम्राज्यवाद मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए. पूरे प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी आक्रोशपूर्ण रहा. प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे सीटू के जिला सचिव गुरनाम सिंह ने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में अपनी ताकत के बल पर मनमानी थोप रहा है. उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी अमेरिका की गुंडागर्दी और साम्राज्यवादी सोच का उदाहरण है. गुरनाम सिंह ने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां लोकतंत्र, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ हैं.

भारत सरकार से स्पष्ट रुख की मांग-

सीटू नेताओं ने भारत सरकार से भी मांग की कि वह इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख अपनाए. उनका कहना है कि अमेरिका की दादागिरी के खिलाफ भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आवाज उठानी चाहिए. सीटू ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी साम्राज्यवादी नीतियों का विरोध नहीं किया गया तो भविष्य में छोटे और विकासशील देशों की संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है. प्रदर्शन के अंत में सीटू कार्यकर्ताओं ने वैश्विक स्तर पर मजदूर एकजुटता को मजबूत करने का संकल्प लिया. उन्होंने कहा कि साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा और किसी भी देश की आजादी और जनता के अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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