न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : दलेर सिंह को उनके स्टेज नाम दलेर मेहंदी से ज्यादा जाना जाता है। दलेर सिर्फ एक गायक भर नहीं हैं, वो कंप्लीट परफॉर्मर हैं, जिनकी क्षमता गाने से लेकर सांग राइटिंग, म्यूजिशयन तक में देखने को मिलती है। दलेर ने अपने पहले एलबम से जो तहलका मचाया वो आज भी जारी है। भारतीय संगीत को पंजाब से जोड़ने का एक नाम दलेर मेहंदी भी हैं। पंजाबी गानों को पहली बार मेनस्ट्रीम इंडियन म्यूजिक में लाने का जिम्मा जितना उन्होंने निभाया वो शायद कोई और नहीं कर सका।
इस मुकाम तक पहुंचने में उन्हें ना जाने कितनी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा, वो कहते हैं ना कि हर मुश्किलें आपको और आपके चरित्र को निखारती हैं। बस इन्हीं मुश्किलों ने दलेर मेहंदी के चरित्र के साथ ही उनकी गायकी को भी निखारा। दलेर सही मायनों में भारतीय संगीत के ध्रुवतारा बन गए हैं। 18 अगस्त 1967 को बिहार के पटना में जन्में दलेर को शुरू से ही गायकी से गहरा प्रेम रहा। पिता ने उन्हें गुरू ग्रंथ साहिब के शबद और रागों के बारे में जानकारी दी। बचपन में जब दलेर गाना शुरू करते तो लोग कहते कि ये लड़का कुछ अलग करेगा।
छोटी उम्र में ही दलेर के प्रशंसकों की संख्या बढ़ने लगी थी लेकिन इस बच्चे के मन में कुछ और चल रहा था। आखिर में उन्होंने फैसला कर लिया गुरू के पास जाने की। किस्मत को सहारा बनाकर उन्होंने 11 साल की उम्र में घर छोड़ दिया। घर से भागकर वो गोरखपुर चले आए। यहां उन्होंने राहत अली खान से संगीत से शिक्षा ली। गुरू ने उन्हें संगीत की हर बारीकियों से परिचित कराया। गुरू का ही आशीर्वाद रहा कि दलेर ने 13 साल की उम्र में 20 हजार से ज्यादा लोगों के बीच स्टेज परफॉर्मेंस दी और खूब वाहवाही बटोरी।
साल 1991 में दलेर के लिए सफलता के नए आयाम खुल गए। उन्होंने अपना ग्रुप बनाया जिसमें उनके भाई और दोस्त शामिल ते। 1994 में कजाकिस्तान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कंसर्ट में भाग लेने के लिए दलेर मेहंदी पहुंचे। यहां वो भारत को रिप्रजेंट कर रहे थे, वो कंसर्ट में दूसरे स्थान पर आए। इसके बाद दलेर ने ना सिर्फ एलबम निकाले, बल्कि बॉलीवुड में भी उन्हें इंट्री मिल गई। ‘ना ना ना रे’, ‘धुन तुड़क तुड़क’, ‘कजरारे, कजरारे नैना वाले’ आदि शुरूआती एलबम से ही वो लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गए।
इसके बाद के दलेर ने जो सफर आज तक तय किया है उसे शब्दों में बयां करना संभव नहीं है। फिर बाहुबली : द कॉन्क्लूजन हो या पोस्टर ब्यॉय फिल्म दलेर का नाम जुड़ना मतलब सिनेप्रेमियों के लिए कुछ खास की गुंजाइश हमेशा रहती है। इसके साथ ही वो सामाजिक मुद्दों से जुड़े अभियान में भी हिस्सा लेते हैं। 1998 में दलेर मेहंदी ने दलेर मेहंदी ग्रीन ड्राइव की शुरूआत की ताकि पर्यावरण संरक्षण में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ा जाए। कहानियां और भी हैं, फिलहाल इतना ही।
”हैप्पी बर्थडे टू यू दलेर मेहंदी।”




