चंडीगढ़ः आशुतोष (Ashutosh Maharaj) मामले पर दिव्य जागृति संस्थान को राहत देते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि वह धार्मिक मामलों में दखल नहीं देंगे, ये आस्था से जुड़ा मामला है। यानि अब आशुतोष महाराज की समाधि जारी रहेगी। कोर्ट की डबल बेंच ने ये फैसला सुनाया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि आशुतोष महाराज के शरीर का समय-समय पर निरीक्षण होता रहेगा। हाईकोर्ट ने दिलीप की याचिका पर भी कहा कि वह दिलीप झा के DNA संबंधी रिट पिटीशन पर भी वोट इंटरफेरेंस नहीं करेगा लेकिन इस मामले में दिलीप झा सिविल सूट फाइल कर सकते हैं जिसके बाद संस्थान को उन्हें DNA मिलाने के लिए नमूने देने होंगे।
कौन हैं आशुतोष महाराज
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक. आशुतोष महाराज का जन्म 1946 में हुआ. मूलरूप से बिहार के मिथिलांचल के रहने वाले. सन 1983 में धर्म प्रचार शुरू किया. धर्म प्रचार के दौरान कई बार हमले भी हुए. धीरे-धीरे शिष्य जुड़े और महाराज कहे जाने लगे.
दिव्य जागृति संस्थान के बारे में…
आशुतोष महाराज ने जालंधर के नूरमहल में 1983-84 में आश्रम की स्थापना की. सन 1991 में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की स्थापना. 1997 में दिल्ली के पीतमपुरा में मुख्यालय का निर्माण. नूरमहल आश्रम 260 एकड़ में फैला हुआ.
आशुतोष महाराज (Ashutosh Maharaj) से जुड़ा विवाद क्या है?
साल 2014 में समाधि में चले गए. 28 जनवरी 2014 को शरीर फ्रीजर में रखा गया. दिलीप झा ने बेटे होने का दावा किया. दिलीप झा ने शरीर मांगा पर अनुयायियों ने देने से इनकार किया. दिलीप झा ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में केस फाइल किया. आशुतोष महाराज को क्लीनिकली डेड घोषित किया गया. हाईकोर्ट ने 5 जुलाई 2017 को फैसला सुनाया. फैसला दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के हक में आया. कोर्ट ने धार्मिक मसलों पर दखल देने से इनकार किया. पिछले तीन साल से समाधि में आशुतोष महाराज. सेवा में आज भी 36 सेवादार लगे हुए.
अंतर्ध्यान को माने या फिर विज्ञान को ? कौन सच है? ये सवाल 2014 से जैसे का तैसे बना हुआ है। दिव्य ज्योति संस्थान के मुखी आशुतोष महाराज की जिंदगी और मौत की पहेली पिछले तीन साल से उलझी हुई है. डॉक्टरों का मनना है कि मेडिकल साइंस के हिसाब से आशुतोष महाराज की मौत हो चुकी है. उनके शरीर के तमाम अंगों ने काम करना बंद कर दिया. लेकिन आश्रम के संचालकों का कहना है कि महाराज अंतर्ध्यान हैं. उन्होंने समाधि ले ली है. पर आखिर सच क्या है, इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता और अब तो कोर्ट ने भी दखल देने से इनकार कर दिया।



