SC Rejected Umar Khalid Bail: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों की साज़िश में उमर ख़ालिद की ज़मानत की ख़ारिज, पाँच को मिली ज़मानत, जाने क्या रहे जमानत न मिलने के कारण?

SC Rejected Umar Khalid Bail on Delhi Riot: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के साज़िश के मामले में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत…

SC Rejected Umar Khalid Bail on Delhi Riot:

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के साज़िश के मामले में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिका ख़ारिज की है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने पाँच अन्य अभियुक्तों (SC Rejected Umar Khalid Bail) को ज़मानत दी है. इस मामले में पाँच अन्य अभियुक्तों- गुलफ़िशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफ़ा उर रहमान, मोहम्मद सलीम ख़ान और शादाब अहमद को ज़मानत दे दी. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने यह फ़ैसला सुनाया.

एक साल बाद कर सकते हैं अर्जी-

कोर्ट ने कहा कि अन्य अभियुक्तों की तुलना में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की भूमिका अलग है. मामले के शुरुआती सुबूतों से लगता है कि उमर ख़ालिद और शरजील दंगों की योजना और रणनीति बनाने में शामिल थे. अदालत ने कहा कि इस आदेश के एक साल बाद या गवाहों की छानबीन पूरी होने के बाद उमर ख़ालिद और शरजील इमाम ज़मानत के लिए फिर से अर्जी दाखिल कर सकते हैं.

SC Rejected Umar Khalid Bail, पांच साल से ट्रायल भी नहीं हुआ शुरू-

ख़ालिद और शरजील समेत सभी सात अभियुक्तों पर साल 2019 में सीएए (नागरिकता संशोधन क़ानून) विरोध प्रदर्शनों की आड़ में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की साज़िश का आरोप है. अभियुक्तों की दलील थी कि वे पांच साल से ज़्यादा समय से जेल में हैं, फिर भी ट्रायल शुरू नहीं हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि इस मामले में कई अन्य अभियुक्तों को ज़मानत मिल चुकी है, इसलिए उन्हें भी ज़मानत दी जानी चाहिए. इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने सितंबर में इन सभी सात अभियुक्तों की ज़मानत याचिकाएं ख़ारिज कर दी थीं.

दिल्ली के दंगों में हुई थी 53 की मौत-

छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता उमर ख़ालिद सितंबर 2020 से ही जेल में बंद हैं. उन पर आरोप है कि उन्होंने फ़रवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा को भड़काया था. उनके ख़िलाफ़ अनलॉफुल एंड ऐक्टिविटिज़ प्रिवेंशन एक्ट यानी यूएपीए के तहत आरोप लगाए गए हैं. इस मामले में अब तक दो अदालतें उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज कर चुकी हैं. सुप्रीम कोर्ट में उनकी ज़मानत याचिका अप्रैल 2023 से लंबित थी.

नागरिकता कानून में संशोधन (सीएए) के ख़िलाफ़ दिसंबर 2019 में व्यापक पैमाने पर आंदोलन हुआ था. इस संशोधन के बाद मुस्लिमों को छोड़कर हिंदू और जैन जैसे समुदाय के लोगों को नागरिकता दिए जाने की बात थी. प्रदर्शन करीब तीन महीने तक चले थे. फ़रवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क उठे थे. इसमें 53 लोग मारे गए. इनमें से अधिकांश मुसलमान थे.

अन्य खबरें जानें- 

Missing Swaroop Case: लापता स्वरूपों के मामले में पंजाब- चंड़ीगढ़ में 14 जगह तलाशीः 2 गिरफ्तार, फोन, टैबलेट, लैपटॉप समेत जानिए एसआईटी ने क्या-क्या किया जब्त?

खबरों के लिए जुड़े रहिए LIVING INDIA NEWS के साथ 24/7 LIVE

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *