मौसम और मतलब

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : देश है। विविधता है। अलग रूप है। अलग रंग हैं। भाषाई भिन्नता है। विडंबना है कि भिन्नता को एकसूत्र में पिरोने वाली…

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : देश है। विविधता है। अलग रूप है। अलग रंग हैं। भाषाई भिन्नता है। विडंबना है कि भिन्नता को एकसूत्र में पिरोने वाली भाषा अंग्रेजी है। लेकिन अच्छा लगता है जब अहिन्दीभाषी हिन्दी में कविता रचता है।

www.livingindianews.co.in के नये कॉलम साहित्य के लिए पहली रचना पूर्वोत्तर भारत से आई है।

जहां से सूरज अपने देश में दस्तक देता है, जो इलाका अपनी मौसमी विविधता की वजह से पर्यटकों को आकर्षित करता है, जहां तवांग जैसा पर्यटन स्थल है, उस अरूणाचल प्रदेश के तारो सिन्दिक की कविता भी विविधता को समेटे हुए है।उनकी कविता पढ़ते हुए आपको पता भी नहीं चलेगा कि कैसे एक कविता पढ़ते हुए मौसम, एक मुनाफाखोर इंसान में बदल जाता है…

मौसम और मतलब

                                                                    – तारो सिन्दिक
मौसम का मिजाज़ है
देखो कैसे बदलता है
अभी तो तमतमाते
गुस्से में झुलस रहा था
कि सफेद-काली चादर बन
बिछ गया
poem2

उजली नीली फलक पर
अंगड़ाई लेकर
करवट जो बदला
बन गयी बूँदों की एक फौज
संगीत के धुन पर नाचे
हर एक चमकीला सिपाही
साथ नचाये प्यासी धरती
कभी पागलों सा दहाड़ लगाते
दौड़ता फिरे आसमानी जंगलों में
ना जाने किस मोड़ पर
भटके राही के समान
रुख मोड़ ली बनकर तूफान
अपने गुस्से का हिसाब
चुकता करे बेकसूर धरा से
मन जब भर आये
बन जाता मासूम मलयज
देता सबको प्रेम आलिंगन
मौसम का बदलना
धर्म है, सत्य है, सनातन है
एक और मौसम है
मौसम है कि रंग है
मुनाफा का गंध सूंघकर
बदलता है इंसान में।

सहायक प्राध्यापक,
दोञ्यी-पोलो शासकीय महाविद्यालय, कामकी
वेस्ट सियाङ जिला, अरुणाचल प्रदेश – 791001
Mob : 9402963147
Email : tarosindik@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *