न्यूज डेस्क/ लिविंग इंडिया : पंजाब सरकार की नादानी कहें या काम करने का तरीका, जिस वादे पर जीतकर कैप्टन सरकार सत्ता में आई, उसी को भूल गई है। दरअसल हम बात कर रहे हैं किसानों की खुदकुशियों की। किसान खुदकुशी करते जा रहे हैं और सरकार है कि आश्वासन ही दे रही है। अब सरकार ने गठन किया है विधानसभा समिति का, जो यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर पंजाब के किसान खुदकुशी क्यों कर रहे हैं। जबकि 99 प्रतिशत मामलों में खुदकुशी का कारण कर्ज बताया गया है।
पंजाब विधान सभा के विधायकों की एक समिति ने शुक्रवार को श्री मुक्तसर साहिब जिला के खुदकुशी कर चुके अलग-अलग गांवों के किसानों के परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान समिति सदस्यों ने लोगों से किसान और खेत मजदूरों की खुदकुशियां रोकने से संबंधित सुझाव भी लिए। चेयरमैन सुखबिन्दर सिंह सरकारिया ने बताया कि इस समिति का गठन विधानसभा ने किसानों की खुदकुशियों पर रोक लगाने से जुड़े मामलों के स्थायी हल निकालने के लिए किया गया है।
समिति हर दिन राज्य के अलग-अलग जिलों में जाकर खुदकुशी कर चुके किसानों और खेतिहर मजदूरों के पिता से मिलकर बातचीत करेगी। उनसे मिले सुझाव के आधार पर खुदकुशियों पर रोक लगाने की पहल की जाएगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि खुदकुशी किसी समस्या का हल नहीं है। क्योंकि इससे परिवार के समक्ष समस्याएं भी उत्पन्न खड़ी हो जाती हैं। समिति दिसंबर तक सारी रिपोर्ट और सुझाव सरकार को सौंप देगी। दरअसल सरकार की कोशिश है कि खुदकुशियों को किसी ना किसी तरीके से रोका जाए।


