न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : अपने करतूतों को लेकर चर्चा में रहने वाली रेवाड़ी पुलिस का एक नया कारनामा उस वक्त सामने आया, जब पुलिस ने 2 दिन के मासूम की सामान्य मौत को हत्या बताकर मात्र 16 घंटों में ही उसका फैसला कर दिया। यहां तक कि पुलिस कप्तान का हवाला देकर बेकसूर लोगों पर इस कदर दबाव बनाया कि आनन-फानन में उन्हें 2.50 लाख रूपए देकर अपना पीछा छुड़ना पड़ा। इतना ही नहीं, पुलिस ने इस मामले में यह जानने तक की जहमत नहीं उठाई कि आखिर मासूम की यह मौत सामान्य है या फिर हत्या हुई है।
जी हां, हम बात कर रहे हैं रेवाड़ी के दिल्ली रोड स्थित अभय सिंह चौक की, जहां राजस्थान के कुछ मजदूर झुग्गी डालकर वर्षों से रह रहे हैं। 8 सितंबर की रात को एक झुग्गी में 2 दिन के एक मासूम की मौत हो गई थी। इसी दौरान झुग्गियों के बगल में बनी पूर्ण नगर कॉलोनी में रात को अचानक बत्ती गुल हो गई। कॉलोनी के कुछ लोग जब ट्रांसफार्मर को देखने के लिए अपने घरों से झुग्गियों की ओर गए तो परिजनों ने हल्ला मचा दिया कि कॉलोनी के एक युवक के पैर के नीचे दबने से मासूम की मौत हो गई है।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी युवक समेत कॉलोनी के कुछ लोगों को थाने बुला लिया और पुलिस कप्तान का हवाला देते हुए आरोपी युवक और कॉलोनी के लोगों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। आखिरकार 2.50 लाख रूपए में मासूम की मौत का सौदा तय हुआ। इसके तुरंत बाद मासूम के परिजन और झुग्गी वालों का कथित ठेकेदार रातों रात झुग्गी छोडक़र वहां से रफू-चक्कर हो गए। अब झुग्गी के लोग भी यह मान रहे हैं कि मासूम की मौत युवक के पैर के नीचे दबने से न होकर उस पर लकड़ी गिरने से हुई थी।
कॉलोनी वासियों की मानें तो इन झुगिगयों में वर्षों बिजली चोरी होने के कारण आए दिन उनके घरों में लगे बिजली उपकरण जल जाते हैं। जिसे लेकर वे बिजली निगम के अधिकारियों से लेकर विजिलेंस अधिकारियों तक शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन इस मामले में पूरी तरह आंखें मूंदे बैठा है और घटना के वक्त भी अचानक बत्ती गुल होने जाने के कारण वे यही देखने गए थे। आरोप लगाया गया कि रकम ऐंठने के लिए यह प्रपंच रचा गया था। जिसमें पुलिस की भी मिलीभगत थी।
कुछ भी हो, इस मामले में हैरान करने वाली बात यह रही कि पुलिस ने मासूम की मौत के कारणों को जानने तक की जहमत नहीं उठाई। दूसरी तरफ पुलिस के आला अधिकारी भी अनभिज्ञता जाहिर करते हुए मामले से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में दोषी लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है। या एकबार फिर इस गंभीर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। क्या मासूम को मौत के बाद न्याय मिलेगा या सिस्टम खामोश बैठा रहेगा।
