‘टी हक कमेटी’ की रिपोर्ट पर सवालों में घिरी कैप्टन सरकार

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : पंजाब में किसानों की खुदकुशी और कर्जामाफी सबसे बड़ा मुद्दा है। यहां तक कि कैप्टन सरकार ने सत्ता में आने पर कर्जामाफी…

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : पंजाब में किसानों की खुदकुशी और कर्जामाफी सबसे बड़ा मुद्दा है। यहां तक कि कैप्टन सरकार ने सत्ता में आने पर कर्जामाफी को पूरी तरह लागू करने की घोषणा भी कर दी थी। सरकार ने दावा किया था कि किसानों की हरसंभव मदद की जाएगी। कर्जा और कुर्की से मुक्ति दी जाएगी। लेकिन सरकार के दावों के बावजूद किसानों की खुदकुशी नहीं रूक सकी। लगातार खुदकुशी से सरकार पर विपक्षी पार्टियां हमलावर हो चुकी हैं। हैरानी की बात यह रही कि 15 अगस्त को गुरदासपुर में कैप्टन अमरिंदर सिंह किसानों की समस्याओं के समाधान के साथ ही उनसे आत्महत्या नहीं करने की अपील कर रहे थे और दूसरी तरफ चार किसानों ने खुदकुशी कर ली।

दरअसल ये पंजाब की राजनीति है जिसमें किसानों की खुदकुशी हमेशा मुद्दा भर बनकर रह गई। चार महीने से ज्यादा के कैप्टन सरकार में कर्ज से परेशान करीब 150 किसानों ने खुदकुशी कर ली। हालांकि ये सरकारी आंकड़ा है, हकीकत में कर्ज की मार किसानों पर इतनी बुरी है कि हर गुजरते दिन के साथ एक या उससे ज्यादा किसान खुदकुशी कर रहा है। वहीं सरकार ने कर्जमाफी को लेकर टी हक कमेटी का गठन कर दिया, लेकिन कर्जामाफी तो दूर टी हक कमेटी की रिपोर्ट पर ही सरकार और इसके मंत्री सिर-फुटौव्वल कर रहे हैं। शुक्रवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने घोषणा किया कि टी हक कमेटी ने दो दिन पहले रिपोर्ट सौंप दी है, बस यहीं से विवाद शुरू हो गया।

हालात यह है कि पंजाब सरकार कर्जामाफी पर कमेटी की रिपोर्ट के अध्ययन करने से पहले ही विवादों में घिर गई है। वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने CM के बयान पर ही सवालिया निशान लगा दिया। मनप्रीत बादल ने कहा कि एक या दो दिन में कमेटी रिपोर्ट सौंपेगी। मतलब सरकार और उनके मंत्रियों को ही पता नहीं है कि आखिर रिपोर्ट सौंपी गई है या नहीं। अब सरकार की इस लापरवाही पर विपक्षी पार्टियां हमलावर हो गई हैं। अकाली दल से लेकर भाजपा, कैप्टन सरकार के कटघरे में खड़ा करने से पीछे नहीं हट रही हैं। अकाली दल ने साफ-साफ कह दिया है कि किसानों के नाम पर सरकार सिर्फ घोषणाएं कर रही हैं।

अब बात करते हैं कि कैप्टन सरकार ने किसानों के कर्जामाफी के लिए क्या-क्या कदम उठाए। सबसे पहले तो सत्ता में आने के बाद कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि किसानों का कर्जा हर हाल में माफ किया जाएगा। इस बार के बजट में अलग से प्रावधान की बात कही गई थी। सरकार ने बजट में 1500 करोड़ का प्रावधान दिया और वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने सदन में घोषणा किया था कि कर्जामाफी को लेकर कैप्टन सरकार गंभीर है। उन्होंने इशारा किया था कि टी हक कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद घोषणाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में सफलता मिलेगी। अब रिपोर्ट कैप्टन अमरिंदर के पास है और वित्त मंत्री को पता ही नहीं कि रिपोर्ट मिली भी है या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *