गज़ब का विकास: बीमार बुजुर्ग महिला को चारपाई पर उठाकर ले गए लोग

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: हरियाणा सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं और विकास का हर समय ढोल पीटती रहती है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां…

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: हरियाणा सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं और विकास का हर समय ढोल पीटती रहती है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। आए दिनों ऐसे मामले सामने आते हैं, जो ये सोचने को मजबूर कर देते हैं कि 21वीं सदी के दौर में भी लोग अच्छे रास्ते पर चलने के लिए तरस रहे हैं।

एक तरफ देश डिजिटलाइजेशन की ओर बढञ रहा है, इंटरनेट का जाल बिछ रहा है, गांव-गांव तक सड़कें पहुंचाने के बड़े बड़े दावे किए जा हैं, वहीं कुछ गां ऐसे भी हैं जहां लोग सड़क तो छोड़िए, अच्छे रास्ते के लिए भी तरस रहे हैं। जीं हां, आपको बतातें है पूरा मामला। हरियाणा के मोरनी क्षेत्र के बेला गांव में एक 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला की तबीयत अचानक खराब हो गई। ऐसे में गांव वाले उसे चारपाई पर उठाकर करेडन गांव में पक्की सड़क तक लेकर आए। ग्रामीणों में रोष है कि वन विभाग की लापरवाही से वे रास्ते के आभाव में आए दिन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।


जानकारी अनुसार विभाग ने शिवालिक विकास बोर्ड के माध्यम से सितंबर 2019 में कडेरन से बेला रास्ते के निर्माण के लिए 51 लाख 43 हजार रुपए के बजट से बनने वाले रास्ते के लिए निविदाएं आमन्त्रित की थी। लेकिन जनवरी 2020 समाप्त होने को है रास्ता बनने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं दिखी। ग्रामीण रास्ते का निर्माण शुरू करवाने के लिए अनेकों बार विभाग के अधिकारियों सहित पूर्व- विधायक लतिका शर्मा से भी मिले लेकिन वन विभाग टस से मस न हुआ।


सीएम विंडो पर भी लगा चुके हैं गुहार, अब मिलेंगे सीएम से
बेला गांव के अनुसूचित जाति  से सम्बन्ध रखने वाले ग्रामीण हेत राम, वीरेंद्र सिंह, रूपेश, अमरनाथ, नारदा, मंती देवी, नीता, दयावंती, शीला देवी, चरणदास व मनभरी ने बताया कि वो लोग 2 बार सीएम विंडो पर रास्ते निर्माण के लिए गुहार लगा चुके हैं मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। गांव की महिलाओं ने अब मुख्यमंत्री से मिलने का निर्णय लिया है ताकि उन्हें समस्या से अवगत करवाकर रास्ते के निर्माण में बाधा बने वन विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाही की मांग कर सके। क्योंकि सभी प्रक्रियाएँ पूरी करके विभाग ने टेंडर लगाया और कई माह बाद भी उस टेंडर बारे कोई सूचना ग्रामीणों को नहीं मिली। क्या टेंडर लगाकर विभाग केवल खानपूर्ति कर रह था या ग्रामीणों को गुमराह करने की कोई योजना थी, इसकी भी महिलाऐं शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगी।

 

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