ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन एक्ट यानी CAA पर लगातार देश में घमासान मचा हुआ है। तो दूसरी तरफ दुनिया के मानस पटल पर भी इस कानून का पुरजोर विरोध हो रहा है,
इस बीच भारत के लिए परेशानी की बात ये कि अब यूरोपियन यूनियन यानी EU ने इस कानून पर चर्चा के लिए प्रस्ताव लाया गया है। जिसको लेकर भारत ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। सिर्फ यही नहीं तुर्की मलेशिया सहित कई ऐसे देश हैं जिन्होंने CAA का विरोध किया है। लेकिन भारत के लिए ये अच्छी खबर है कि, अमेरिका फ्रास जैसे बडे़ देशों ने CAA को भारत का आंतरिक मामला करार दिया है।
वहीं अब आपको ये बताते हैं कि, जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और नागरिकता संशोधन एक्ट लागू करने के बाद दुनियाभर के देशों ने इस पर क्या रुख अख्तियार किया है।
PAK बुला रहा है इस्लामिक देशों की बैठक
सबसे पहले जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर और भारत में CAA लागू करने पर पाकिस्तान ने दुनियाभर में भारत के खिलाफ ढिंढोरा पीटना शुरू कर दिया था। इस दौरान पाकिस्तान ने कहा कि, अगर भारत में CAA लागू हुआ तो भारत के मुसलमानों पर ये जुल्म होगा। वहीं अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने CAA के खिलाफ इस्लामिक देशों के प्रमुखों को इस मुद्दे पर एक-साथ आने को कहा है।
यूरोपियन यूनियन तक पहुंचा मामला
यूरोपियन संसद नागरिकता संशोधन एक्ट यानी CAA के मामले पर प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। जिसपर भारत पहले ही कड़ी आपत्ति जता चुका है। यूरोपियन संसद में 29 जनवरी को प्रस्ताव पेश किया जाएगा, वहीं इस प्रस्ताव पर 30 जनवरी को वोटिंग की जाएगी।
मलेशिया ने भी जताया CAA का कड़ा विरोध
साथ ही नागरिकता संशोधन एक्ट CAA के खिलाफ मलेशिया ने भी विरोध किया है। इससे पहले भी मलेशिया जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मामले में भी भारत की आलोचना कर चुका है। वहीं मलेशियाई के पीएम महातिर मोहम्मद ने भारत की नीति को अल्पसंख्यक विरोधी करार दिया था।
अमेरिका ने बताया था आंतरिक मामला
वहीं अमेरिका की तरफ से भी नागरिकता संशोधन एक्ट पर बयान दिया गया था, जिसमें कहा गया कि नागरिकता संशोधन एक्ट CAA भारत का आंतरिक मामला है।






