महंगा हो सकता है फास्टैग पर सफर करना, जानिए पूरी खबर !

ऑनलाइन डेस्क / लिविंग इंडिया न्यूज़: – जिन लोगों ने अभी तक अपने वाहन में फास्टैग स्टिकर नहीं लगाए हैं, उन्हें अब टोल प्लाजा से…

ऑनलाइन डेस्क / लिविंग इंडिया न्यूज़: – जिन लोगों ने अभी तक अपने वाहन में फास्टैग स्टिकर नहीं लगाए हैं, उन्हें अब टोल प्लाजा से ऊपर-नीचे पत्रक नहीं दिए जाएंगे। उन्हें अब ऑन-ऑफ दोनों पर पूरा टोल टैक्स देना होगा। फास्टैग की समय सीमा 15 जनवरी निर्धारित की गई थी। नए नियमों के अनुसार, अगर ड्राइवर फास्टैग नहीं करता है, तो उन्हें अप-डाउन में टोल से राहत नहीं दी जाएगी। ड्राइवर को टोल प्लाजा पर अतिरिक्त पैसा देना होगा और, अगर फास्टैग में ड्राइवर के पास पैसा नहीं है और वह फास्टैग लेन से गुजर रहा है, तो उससे दोगुनी रकम ली जाएगी। ऐसा पहले नहीं हो रहा था। 15 जनवरी के बाद लागू नियमों के अनुसार, उन ड्राइवरों से दोगुनी राशि ली जाएगी। जिनके वाहन पर फास्टैग स्टीकर नहीं है। अगर एनएचआई तकनीकी समस्या के कारण फास्टैग को ब्लैकलिस्ट किया जाता है, तो ड्राइवर से शुल्क नहीं लिया जाएगा।

लाडोवाल टोल प्लाजा पर $ 260 तक की लागत

कैश लेन से गुजरने वाले ड्राइवरों को पहले लाडोवाल टोल प्लाजा पर 195 रुपये का शुल्क लिया गया था, लेकिन अब उनसे 260 रुपये वसूले जा रहे हैं। यानी अब दोगुना पैसा वसूला जा रहा है। लोगों का कहना है कि टोल प्लाजा को सीधे आदमी की जेब में डाला जा रहा है।

फास्टैग मनी एंडिंग पर टोल टैक्स पास करने से दो घंटे पहले पैसा कमाया गया

अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी ड्राइवर के पास फास्टैग कार्ड पर पैसा नहीं है और उसे किसी काम के लिए टोल टैक्स से गुजरना पड़ता है, तो फास्टैग को कम से कम दो घंटे पहले रिचार्ज कराना होगा। अन्यथा, फास्टैग काली सूची टोल प्लाजा पर दिखाई देगी।

जानिए क्या है फास्टैग

बतादें कि 1 दिसंबर 2019 से देशभर के नैशनल हाइवे के टोल प्लाजा की सभी लेन इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस हो चुकी हैं। यहां टोल टैक्स इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से चाहती है।  ताकि लोगों को टोल प्लाजा पर बेवजह समय न गंवाना पड़े। यह रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग गाड़ी की विंडस्क्रीन पर लगता है जो बैंक अकाउंट या नैशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पेमेंट वॉलिट से जुड़ा होता है। इससे गाड़ी मालिकों को टोल प्लाजा से गुजरते रुकने की जरूरत नहीं होती है और रकम अकाउंट से अपने आप कट जाता है। फास्टैग रूल्स, 2008 के मुताबिक फास्टैग लेन फास्टैग यूजर्स की आवाजाही के लिए खासतौर पर रिजर्व होता है।

ट्रायल के दौरान हुआ फास्टैग फैल

इससे पहले साइबर सिटी में फास्टैग लाइन को लेकर टोल प्रबंधन के हाथ पैर फूलते नजर आए। ट्रायल के दौरान ही यहां जयपुर एक्सप्रेसवे पर लंबा जाम लग गया था, जिसे खुलवाने के लिए टोलकर्मियों के पसीने छूट गए थे। इसी जाम के डर के कारण खेड़की दौला टोल प्लाजा की लेन कैशलेस नहीं हो सकी, जाम के डर के कारण यहां पर ज्यादातर लेन में टोल कैश लेकर ही काटा जा रहा है। इस टोल प्लाजा पर 80 हजार के आसपास गाड़ियों का आवागमन होता है, 70 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने फास्टैग की सर्विस ली है, लेकिन फास्टैग मेंटनेंस नहीं होने के कारण जाम की समस्या बनी रहती है। यहां पर कुल 25 लेन हैं जिनमें से 2 इमरजेंसी के लिए छोड़कर 4 लाइनों को कैश के लिए रखा गया है। लेकिन अभी तक कैशलेन के कम नहीं किया जा सका है।

घरौंडा टोल प्लाजा बना परेशानी का लबब

वहीं घरौंडा टोल प्लाजा पर भी फास्टैग के कारण मुसीबत बनी। यहां पर सिंगल कैश लेन होने के कारण वाहन चालक परेशान होते रहे,  फास्टैग मेंटनेंस नहीं होने के कारण टोल पर कई घंटों तक लंबा जाम लगा रहा। यहां से गुजरने वाले ज्यादातर वाहन चालक टोल प्रबंधन की कारगुजारी से परेशान नजर आए। टोल पर एक ही कैशलेन होने के कारण ये पूरी परेशानी बनी हुई है। केंद्र सरकार के निर्देशों के बावजूद भी अभी तक सिर्फ 50 प्रतिशत ही लोगों ने अपने वाहनों पर फास्टैग लगवाया है।

 

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