ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज:केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और जनगणना के चरण 2021 पर चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलाई इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी बीजेपी द्वारा शासित कुछ राज्यों ने एनपीआर के कुछ पहलुओं पर आपत्ति जताई।और कुछ राज्यों ने एनपीआर का विरोध किया है,
पश्चिम बंगाल और केरल ने कहा है कि वे अभ्यास में भाग नहीं लेंगे क्योंकि यह एक राष्ट्रव्यापी नागरिक रजिस्टर एनआरसी के लिए एक कदम है। राज्यों ने कहा है कि प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी एनआरसी और एक संशोधित नागरिकता कानून का संयोजन प्रकृति में विभाजनकारी है। इस दौरान गृह मंत्रालय कहा है कि एनपीआर का उद्देश्य सभी सामान्य निवासियों का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है।
तो दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि वह राज्य के मुख्य सचिवों और अन्य अधिकारियों के सम्मेलन में भाग नहीं ले रही है, एनपीआर के तौर-तरीकों पर चर्चा करने के लिए, केरल बैठक में शामिल हुआ और कहा कि राज्य ने कवायद शुरू कर दी है और यह प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है वहीं राजस्थान के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने कहा कि उन्होंने और कुछ अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने एनपीआर अभ्यास के दौरान लोगों से कुछ सवाल पूछे जाने पर आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि, एनपीआर में कुछ प्रश्न अव्यावहारिक हैं, जैसे माता-पिता के जन्म स्थान से संबंधित प्रश्न। देश में ऐसे कई लोग हैं जो यह भी नहीं जानते कि उनका जन्म स्थान क्या था। मुझे नहीं पता कि इस तरह के सवालों का उद्देश्य क्या है और हमने बैठक में ऐसे सवालों को दूर करने के लिए कहा है।इस तरह के सवाल पहले भी पूछे जा चुके हैं, लेकिन अब व्यक्तिगत जन्म स्थान को उसके माता-पिता के जन्म स्थान से जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब अनिवार्य नहीं है।



