करगिल विजय दिवस : महज 19 साल में सेना का सर्वोच्च सम्मान

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : धर्मनगरी कुरुक्षेत्र वह धरती जहां धर्म और अधर्म की लड़ाई लड़ी गई। इसी धरती पर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया…

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : धर्मनगरी कुरुक्षेत्र वह धरती जहां धर्म और अधर्म की लड़ाई लड़ी गई। इसी धरती पर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। इसी धरती के वीर सपूत एक वीर सपूत संजीव कुमार सिंह ने 1999 में हुए करगिल युद्ध में अपनी जान को न्योछावर कर दिया। महज 19 साल की उम्र में कौलापुर गांव के संजीव कुमार करगिल युद्ध के दौरान दुश्मन से लोहा लेते हुए सैनिकों के सर्वोच्च सम्मान शहादत को प्राप्त हुए। संजीव को एक साल भी नहीं हुए थे, सेना में शामिल हुए, लेकिन देशभक्ति का जुनून ऐसा था कि उन्होंने दुश्मनों को कड़ी टक्कर दी थी। संजीव करगिल युद्ध से ठीक एक माह पहले घर आए थे और उनकी शादी की बात चल रही थी। लेकिन युद्ध की घोषणा हो गई और संजीव अपनी मां से मातृभूमि के रक्षा की बात कहकर निकल पड़े सीमा पर तैनात अपने साथियों के साथ दुश्मनों से लोहा लेने के लिए। संजीव की मां पार्वती बताती हैं कि संजीव को बचपन से ही बंदूक चलाने का शौक था। यह शौक उसे भारतीय सेना में लेकर चला गया।

कौलापुर में 1980 में पैदा हुए संजीव ने गांव से ही शुरूआती पढ़ाई की थी। 24 फरवरी 1998 को संजीव सेना की सिख रेजीमेंट शामिल हो गए थे। प्रशिक्षण के उपरांत पाकिस्तान के साथ हुए कारगिल युद्ध में संजीव की द्रास सेक्टर में तैनाती कर दी गई। कई दिनों तक दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए चार घुसपैठियों को मार गिराया। घायल होने के बावजूद भी संजीव ने साहस नहीं छोड़ा और एक घुसपैठिये को मार गिराया। आखिरकार देश की सुरक्षा करते हुए संजीव 6 जुलाई 1999 को शहादत को प्राप्त हो गए। कारगिल युद्ध में शहीद संजीव कुमार के सम्मान में प्रदेश सरकार ने कई घोषणाएं की थीं। उनमें मात्र दो घोषणाएं पूरी की गई हैं। इनमें पिपली-बाबैन सड़क और गांव में स्थित राजकीय उच्च विद्यालय को शहीद संजीव के नाम पर रखा गया। लोगों ने संजीव के नाम पर लाइब्रेरी और उनकी एक आदमकद प्रतिमा गांव में स्थापित की है। आज भी गांव के बच्चे संजीव की शहादत से प्रेरणा लेते हैं और देश सेवा का संकल्प लेते रहते हैं। देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले संजीव की शहादत और हौसले की कहानी अभी भी लोगों की जुबान पर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *