करिगल विजय दिवस : जीत का नायक ‘बोफोर्स तोप’

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया: तीन दशक से ज्यादा समय गुजर गए लेकिन बोफोर्स तोप खरीद में हुए घोटाले पर राजनीति जारी है। घोटाले को लेकर न्यायालय का…

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया: तीन दशक से ज्यादा समय गुजर गए लेकिन बोफोर्स तोप खरीद में हुए घोटाले पर राजनीति जारी है। घोटाले को लेकर न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया गया। तोप बनाने वाली कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया। लेकिन अब सरकार ने बोफोर्स को काली सूची से हटाकर इसके रखरखाव के लिए कई कार्य कर रही है। विवादों के बावजूद बोफोर्स तोप ने अपनी काबिलियत साबित की वो भी करगिल के युद्द में। जब पहाड़ की चोटियों पर बैठे पाकिस्तानी सेना के जवानों और आतंकवादियों के सिर पर बोफोर्स तोप से गोले बरसाए गए तो दुश्मनों का हौसला टूटना लाजिमी ही थी। कह सकते हैं कि बोफोर्स तोप करगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के लिए ट्रबल शूटर साबित हुआ, जिसने युद्ध में भारत के शानदार जीत की बुनियाद रखी। अत्याधुनिक तकनीकों से लैस बोफोर्स तोप से करीब 25 किलोमीटर दूर तक गोला दागा जा सकता है। इस तोप से लेजर गाइडेड गोले दागे जा सकते हैं जो लक्ष्य पर सटीक निशाना लगा सकता है।

यही कारण था कि करगिल युद्ध में बोफोर्स तोप सेना का मुख्य मददगार साबित हुआ था। बोफोर्स की गिनती दुनिया के सबसे घातक तोपों में होती है। हल्के वजन के कारण इसे किसी भी युद्धभूमि में आसानी से ले जाया जा सकता है। इस तोप की सबसे बड़ी खासियत गोले दागने की इसकी क्षमता है। यह तोप एक मिनट में करीब दस गोले दाग सकता है। यहीं तक कि यह तोप -3 से 70 डिग्री तक फायर कर सकता है। पहाड़ी इलाकों में यह खूबी काफी मददगार साबित होती है, यही कारण था कि करगिल युद्ध के दौरान बोफोर्स सेना का मुख्य हथियार बन गया था। बोफोर्स में 68 हॉर्सपावर के दो इंजन लगे होते हैं और दोनों में 22 लीटर तक ईंधन भरा जा सकता है। वहीं इस तोप से रात के घुप्प अंधेरे में भी दुश्मनों पर गोले दागे जा सकते हैं। डीआरडीओ ने बोफोर्स के तोप के मूल डिजाइन में कई सुधार करके इसे और भी बेहतर बना दिया है, हालांकि इसके प्रारंभिक परीक्षण ही हुए हैं, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में यह भारतीय सेना का मुख्य हथियार बन जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *