Chandigarh : रिमझिम बरसते मेझों के बीच अपने आराध्य की भक्ति में लीन आगे बढ़ते भक्तों की टोली को देखकर आप समझ जाएंगे कि देवाधिदेव महादेव की आराधना का पावन महीना सावन शुरू हो गया है। सावन को भगवान शिव की भक्ति का महीना कहा जाता है। माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए सावन माह में विशेष आराधना की थी। यहां तक कि भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण से पहले शिवजी की पूजा की थी। भगवान शिव आशुतोष हैं, वो भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए कहा जाता कि सावन में भगवान शिव की भक्ति करने से तमाम रोग, विषाद, दुख समाप्त हो जाता है और मानव शिवलोक में स्थान पाता है।

भगवान शिव को प्रसन्न करने का माध्यम
सावन का महीना धार्मिक नजरिए से भी काफी महत्वपूर्ण है। सावन को साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। जिस तरह प्रत्येक दिन किसी भी देवी-देवता की पूजा के लिए उपयुक्त होता है, उसी तरह सावन का महीना भगवान शिव को प्रसन्न करने का माध्यम है। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन में निकले विष को भगवान शिव ने सावन के महीने में ही ग्रहण किया था। जिससे उनके शरीर का तापमान बढ़ने लगा। ऐसे में भगवान भोलेनाथ ने शीतलता के लिए अपने सिर पर चंद्रमा को धारण किया। यहां तक कि इंद्र देव ने मूसलाधार बारिश कर दी, ताकि भगवान शिव के शरीर का तापमान कम हो। इस वजह से सावन के महीने में तेज बारिश होती है, वहीं भक्त भगवान का जलार्पण करते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त गंगाजल लेकर कांवर यात्रा करके देवाधिदेव महादेव को अर्पित करते हैं।

पचास साल बाद सावन में अद्भुत संयोग
इस साल सावन के महीने में एक अद्भुत संयोग भी है। पचास साल बाद इस पावन महीने की शुरुआत और समापन सोमवार से हो रही है। सावन इसलिए भी विशेष माह है कि ये हमें प्रकृति से जोड़कर शिव भक्ति के रस से सराबोर करता है। भगवान शिव निराकार हैं और पार्वती मूल प्रकृति, जिनमें रूप, रंग और कलाएं निहित हैं। शिव संहार के देवता हैं, इसलिए क्रोध महादेव का स्वाभाविक गुण है, लेकिन प्रकृति कोमल और करुणामयी है। वो खुद महाकाल हैं जिनके भक्तों का काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। इसलिए तो भगवान शिव देवों के देव भी कहे जाते हैं। सावन माह की सोमवारी का व्रत अपने आप में महत्वपूर्ण है। ज्योतिषियों की मानें तो नियम-संयम से इस पावन महीने के सोमवार को भगवान शिव की आराधना से विशेष कृपा मिलती है। भगवान को दूध, विल्व पत्र, भांग, धतूरा के साथ गंगाजल अर्पित करने से वो प्रसन्न होते हैं।
सावन सोमवारी व्रत की तिथि
सोमवारी व्रत का शुभारंभ : 10 जुलाई
दूसरी सोमवारी : 17 जुलाई
तीसरी सोमवारी : 24 जुलाई
चौथी सोमवारी : 31 जुलाई
व्रत का समापन : 7 अगस्त (रक्षा बंधन)
पूजन की विधि
भगवान शिव की आराधना से पहले पूजन सामग्री जमा कर लें। इसके बाद जल, गंगाजल या दूध से अभिषेक करें।पूजा के समय महामृत्युंजय और लिंगाष्टकम का उच्चारण शिव को प्रिय है। सावन का सोमवारी व्रत बड़ा ही फलदायक है। सोमवारी व्रत करने से सारी मनोकामना पूरी होती है।
भगवान शिव : प्रकृति के आदि और अनंत
भगवान शिव एक तरफ देवताओं के लिए पूजित हैं तो दानव भी उनकी पूजा करते हैं। देवताओं के लिए वे आराध्य हैं तो दैत्यराज रावण भी उनके अनन्य भक्त कहलाते हैं। जो कहीं भी आश्रय नहीं पाता है उसे भगवान शिव अपने पास स्थान देते हैं। हालांकि वर्तमान समय में सावन का स्वरूप बदलता जा रहा है। लोग इस महीने में शाकाहार पर जोर देते हैं, जबकि आत्मशुद्धि को किनारे रख देते हैं। सावन का महीना माध्यम है प्रकृति से खुद को जोड़ने का। यह महीना प्रकृति के संरक्षण की भी जानकारी और गलत विचारों से खुद को दूर रहने की सीख देता है। इसलिए सावन महीने में भगवान शिव की भक्ति के साथ प्रकृति के संरक्षण के लिए भी कार्य करें। क्योंकि भगवान शिव प्रकृति की मूल में हैं और उनसे ही प्रकृति का आदि और अनंत जुड़ा हुआ है। भगवान शिव की भक्ति में ही जीवन है और उसी से जीवन भी है।
महादेव आप सबों का कल्याण करें। ओम नम: शिवाय।

