गुरुग्राम, 16 अक्टूबर
अंतरिक्ष में लगातार जमा हो रहे कचरे (स्पेस डेब्री) से निपटने और स्पेस मिशनों को सुरक्षित बनाने की दिशा में गुरुग्राम स्थित सैमटेल एवियोनिक्स लिमिटेड ने एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। कंपनी ने जापान की प्रमुख स्पेस-टेक कंपनी बुल के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत दोनों देश मिलकर अंतरिक्ष से मलबे और बेकार पड़ी सैटेलाइट्स को हटाने के लिए अत्याधुनिक इंडो-जापानी तकनीक विकसित करेंगे।
अंतरिक्ष कचरे से बढ़ा टकराव और विस्फोट का खतरा
सैमटेल एवियोनिक्स के CEO पुनीत कौड़ा ने बताया कि अंतरिक्ष में रॉकेटों के टुकड़ों और पुरानी सैटेलाइट्स का भारी कचरा जमा हो रहा है, जिससे आपस में टकराने और बड़े विस्फोट होने का गंभीर खतरा बना रहता है। इसे रोकने के लिए दो प्रकार के सोल्यूशंस पर काम किया जा रहा है। पहला एक्टिव सोल्यूशन है, जिसमें अंतरिक्ष यान में लगे रोबोटिक आर्म के जरिए कचरे को खींचकर वायुमंडल में लाकर नष्ट किया जाएगा। दूसरा पैसिव सोल्यूशन है, जिसके तहत उपकरणों में एक विशेष गुब्बारे जैसी तकनीक फिट होगी, जो मिशन पूरा होने पर अपने आप खुलकर मलबे को सुरक्षित तरीके से जलाकर खत्म कर देगी।
सैमटेल और जापानी स्टार्टअप बुल में MoU
जापानी स्टार्टअप बुल (Bull) के CEO और संस्थापक यासु तो (Yasu To) ने सैमटेल एवियोनिक्स के साथ हुए MoU की घोषणा करते हुए कहा कि इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भविष्य में अंतरिक्ष के मलबे की समस्या से निपटना है, जो कि आने वाले समय में मानवता के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी तकनीक के तहत 10 वर्ग मीटर की एक बड़ी झिल्ली का उपयोग किया जाएगा, जो अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यान को सुरक्षित रखने और अंतरिक्ष के मलबे को हटाने में मदद करेगी। उन्होंने भारत और जापान के बीच इस तरह के सहयोग को दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण और लाभकारी बताया है।
स्पेस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव
पुनीत कौड़ा ने कहा कि भारत अब अंतरिक्ष और डिफेन्स के क्षेत्र में दुनिया के विकसित देशों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। सैमटेल एवियोनिक्स पहले से ही HAL, थल सेना और वायु सेना के लिए उन्नत एवियोनिक्स उपकरण बना रही है और आयात विकल्प के जरिए आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि इस नए स्पेस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार के सामने जल्द ही प्रस्ताव रखा जाएगा, ताकि फंडिंग और सरकारी सहयोग से भारतीय और वैश्विक ग्राहकों को अंतरिक्ष सफाई का एक विश्वस्तरीय भारतीय-जापानी सोल्यूशन दिया जा सके।
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