दिल्ली, 12 अक्टूबर
आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। आज के दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अराधना की जाती है।धार्मिक मान्यता है कि मां के इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को तप, त्याग, वैराग्य और संयम का आशीर्वाद प्राप्त होता है।भक्तों को धैर्य, आत्मबल और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
कैसा है मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप ?
मां ब्रह्मचारिणी सफेद रंग के वस्त्र धारण करती है।मां के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप तपस्या, साधना और संतुलन का संदेश देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पार्वती माता के भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तप्सया की थी। ‘ब्रह्म‘ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी‘ का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप्सया का आचरण करने वाली देवी है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सुबह स्नान क साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और मां की स्वरूप की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले हाथों में फूल लेकर मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें और सुख-समृद्धि की कामना करें।मां ब्रह्मचारिणी को अक्षत, कुमकुम, सिंदूर और सुगंधित फूल अर्पित करें।मां को सफेद या लाल रंग के फूल चढ़ाएं। इसके पश्चात माता को शक्कर, मिश्री, पंचामृत और फलों का भोग लगाएं।घी का दीपक जलाकर मां के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र
मां ब्रह्मचारिणी की कृपा प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है:
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से मन में शांति, धैर्य और आत्मविश्वास का संचार होता है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा भक्तों को तपस्या, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दूसरे दिन सच्चे मन से माता की आराधना करने से जीवन की कठिनाइयों का सामना करने का साहस मिलता है और मन में सकारात्मकता बनी रहती है।



