दिल्ली, 9 अक्टूबर
नोबेल शांति पुरस्कार 2026 की घोषणा हो चुकी है। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ नावी पिल्लै को य़ह पुरस्कार मिलने जा रहा है। उन्हें शांति, अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने और उनके योग्दान के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। नावी पिल्लै ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़ी।वकील के तौर पर नावी पिल्लै ने अपने करियर में नेल्सन मंडेला सहित रंगभेद विरोधी आंदोलन से जुड़े लोगों के अधिकारों की पैरवी की।
कौन हैं नवनेथम ‘नावी‘ पिल्लै?
नावी पिल्लै का जन्म 23 दिसंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका में भारतीय परिवार में हुआ। उनके दादा तमिलनाड़ू से दक्षिण अफ्रीका में आकर बसे।दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद और नस्लीय भेदभाव का सामना करते हुए नावी पिल्लै ने कानून की पढ़ाई की। नावी पिल्लै ने रंगभेद के दौरान राजनीतिक मामलों की पैरवी की।
संयुक्त राष्ट्र से लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों में किया काम
नावी पिल्लै ने संयुक्त राष्ट्र में 2008 से लेकर 2014 तक काम किया। संयुक्त राष्ट्र में काम करने के दौरान नावी पिल्लै ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भेदभाव और पीडितों को न्याय दिलाया। नावी पिल्लै अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में जज और बाद में अध्यक्ष रही। अपने अंतरराष्ट्रीय अदालती कार्यकाल में नावी पिल्लै ने पीड़ितों के अधिकारों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों को प्रमुखता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस साल शांति पुरस्कार की 125वीं वर्षगांठ
शांति पुरस्कार इस साल अपनी 125वीं वर्षगांठ बना रहा है। यह पुरस्कार 1901 में शुरू हुआ था। यह पुरस्कार अब तक 112 लोगों और 28 अलग-अलग संस्थाओं को दिया जा चुका है। रेड क्रॉस ने इसे तीन बार और UN की रिफ्यूजी एजेंसी ने दो बार जीता है।
अन्य खबरें जानें –




